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Thursday, October 15, 2026
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इक जुनूँ इश्क का नायाब है मेरे अन्दर। झाँक कर देख ले महताब है मेरे अन्दर ।।

-लक्ष्मण सिंह-

laxman singh
लक्ष्मण सिंह

इक जुनूँ इश्क का नायाब है मेरे अन्दर
झाँक कर देख ले महताब है मेरे अन्दर

हर सबब सीख गए हम तो ठोकर खा के
ग़म डुबोने हैं तो गिर्दाब है मेरे अन्दर

चश्म में अश्‍क की मुझे जरूरत नहीं
दिल में बहने को ये सैलाब है मेरे अन्दर

इश्‍के अहसास बहा दिल में तेरे दरिया सा
वस्ल को दिल मेरा बेताब है मेरे अन्दर

झूठ खन्जर से जियादा बुरा है उल्फ़त में
जख़्म इसके ही तो शादाब है मेरे अन्दर

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