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Friday, October 16, 2026
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दिन भर की दौड़ धूप में मशग़ूल हैं सभी। ये ज़िन्दगी हमारी मुसलसल सफ़र में है।।

तरही ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

तारों की रोशनी में वही वो शरर में है।
उसका ही नूर झलके जो शम्सो क़मर में है।।
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ज़ोरो जफ़ा है आम वफ़ा किस नज़र में है।
अब किस के दिल में प्यार सुकूॅं किस के घर में है।।
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दिन भर की दौड़ धूप में मशग़ूल हैं सभी।
ये ज़िन्दगी हमारी मुसलसल सफ़र में है।।
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चमका था मिस्ले तूर कभी दिल की राह में।
“मंज़र तेरे जमाल का अब तक नज़र में है”।।
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मिटने लगे बहार के नक़्शो निगार सब।
अब ये चमन हमारा ख़िज़ाॅं के असर में है।।
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आती हैं लग़्जिशें भी ज़ुबानो बयान में।
इस ऐब का भी होना ज़रूरी हुनर में है।।
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वो क़ाफ़िला गया वो मुसाफ़िर चले गए।
उड़ता हुआ ग़ुबार ही “अनवर” नज़र में है।।
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शकूर अनवर
सेठानी चौक श्रीपुरा कोटा 6
Mob 9460851271

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