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Sunday, October 18, 2026
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… उसने तो पल भर में गंगा स्नान कर लिया ॥

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फोटो अखिलेश कुमार

-चांद शेरी-

chand sheri
चांद शेरी

हिन्दी, उर्दू, पंजाबी, कश्मीरी बोलते हैं ।

हर भाषा को दिल की गहराई से तोलते हैं ॥

जहर कितना भी दिलों में घोल दे सियासत यहाँ ।

हम वो हैं जो गंगा के पानी से रोज़ा खोलते हैं ।

मुहब्बत से लबरेज़ हर सामान कर लिया ।

इस दिल को सूर तुलसी रसखान कर लिया ॥

बिस्मिल की शहनाई, सुनी कृष्ण की बांसुरी।

उसने तो पल भर में गंगा स्नान कर लिया ॥

गोर, खुसरो, ग़ालिब, निराला, मेरे अन्दर बोलते हैं।

मेरा भारत मेरी पहचान हम, घर-घर बोलते हैं ॥

हमारा क्या बिगाड़ेगी ये, सरफ़िरी हवायें दोस्तों ।

हम तो हर-हर महादेव, अल्लाहू अकबर बोलते हैं ॥

-चांद शेरी

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