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Saturday, October 17, 2026
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…मग़र जिंदगी तुम जैसी भी हो बहुत पसंद हो

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-अनीता मैठाणी-

anita maithani
अनीता मैठाणी

क्यूं कभी हंसी
तो कभी ग़म सी हो
बसंत तो कभी पतझड़ सी हो
कभी पहाड़ तो कभी समंदर सी हो.

घाव तो कभी मरहम सी हो,
क्यूं भागती तो कभी रूकी सी हो
कभी मुट्ठी तो कभी खुली हथेली सी हो
सन्न… खट्टी, तो कभी अहा… मीठी सी हो.

क्यूं कभी जमीं
तो; कभी आसमां सी हो
धानी कभी, कभी फ़िरोजा सी हो
शोर कभी, कभी गुमसुम सी हो.

कभी बचपन तो कभी; बुढ़ापे सी हो
कभी बारात तो कभी; जनाजे सी हो
उलझन कभी, कभी सुलझी सी हो

क्यूं जिंदगी तुम ऐसी हो,
मग़र जिंदगी तुम जैसी भी हो
बहुत पसंद हो

अनीता मैठाणी

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