28.5 C
Kota
Friday, October 16, 2026
Home Literature दिल ने इतने ज़ख्म खाये। रोते रोते सो गया है।।

दिल ने इतने ज़ख्म खाये। रोते रोते सो गया है।।

shakoor anwar books

ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

shakoor anwar
शकूर अनवर

क्या मुक़द्दर सो गया है।
ऐसा कैसे हो गया है।।
*
इस जहाने-रंगो-बू से।
फिर न लौटा जो गया है।।
*
मेरे हिस्से का उजाला।
रास्ते में खो गया है।।
*
तारे किस पर हॅंस रहे हैं।
चाॅंद किस को रो गया है।।
*
दिल ने इतने ज़ख्म खाये।
रोते रोते सो गया है।।
*
आने वाले कल की सोचो।
हो गया जो हो गया है।।
*
गुलशने हस्ती में “अनवर”।
कौन काॅंटे बो गया है।।
*

मुक़द्दर*भाग्य
जहाने-रंगो-बू*रंग और खुशबू की दुनिया
गुलशने हस्ती*जीवन रूपी उपवन

शकूर अनवर
9460851271

Advertisement