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Saturday, October 17, 2026
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धुऑं फ़ज़ा में भला किस लिये उठा होगा। मुझे यक़ीन है मेरा ही घर जला होगा।।

ग़ज़ल

शकूर अनवर

धुऑं फ़ज़ा में भला किस लिये उठा होगा।
मुझे यक़ीन है मेरा ही घर जला होगा।।
*
हमारे बीच में आख़िर ये फ़ासला क्यूँ है।
हमारे बीच यही आज फ़ैसला होगा।।
*
मैं फिर उसी की क़यादत* में कर रहा हूँ सफ़र।
मुझे ख़बर है मेरे साथ हादसा* होगा।।
*
मैं तुम से तर्क- मुहब्बत*करूॅं तो क्या हासिल।
तुम्हारे ग़म में कोई और मुब्तला होगा।।
*
यज़ीदियत* पे है मौक़ूफ़* नज़्म* दुनिया का।
ज़मीं पे फिर कोई कोहरामे- कर्बला* होगा।।
*
न आये दिल में ख़याले-शिकस्तगी* “अनवर”।
सफ़ीना* डूब ही जायेगा और क्या होगा।।
*

फ़ज़ा*वातावरण
क़यादत*मार्गदर्शन
हादसा*दुर्घटना
तर्के-मुहब्बत*प्रेम के संबंध विच्छेद
मुबतला* फॅंसा हुआ प्रेमी
यज़ीदियत*अत्याचारी शासन
मौक़ूफ़*निर्भर
नज़्म*व्यवस्था शासन
कोहरामे-कर्बला*कर्बला जैसी लड़ाई
ख़याले-शिकस्तगी*पराजय का विचार
सफ़ीना*नावों का बेड़ा

शकूर अनवर
9460851271

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