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Thursday, October 15, 2026
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सम्मेद शिखर तीर्थ स्थल ही रहेगा, पर्यटन गतिविधियों पर तत्काल रोक के आदेश

अब श्री सम्मेद शिखर तीर्थ स्थल ही रहेगा। उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। तीर्थ क्षेत्र में कोई निर्माण कार्य नहीं होगा और स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां होटल, ट्रैकिंग और नॉन वेज पर भी रोक रहेगी। तय हुआ है कि एक बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें दो लोग जैन समाज, स्थानीय प्रतिनिधि और सरकार के प्रतिनिधि होंगे. जो भी निर्णय करना होगा बोर्ड करेगा

रांची। केंद्र सरकार ने झारखंड में सम्‍मेद शिखर को पर्यटन स्‍थल के तौर पर सूचीबद्द करने के मामले में अहम फैसला किया हैं। केंद्र सरकार ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस पवित्र तीर्थ स्थल को पर्यटन स्थल बनाए जाने के खिलाफ जैन समाज ने देश भर में प्रदर्शन किया। इसके बाद केन्द्र सरकार ने यह कदम उठाते हुए पर्यटन, इको टूरिज्म गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी है। केंद्र की ओर से 2019 की अधिसूचना के खंड 3 के प्रावधानों पर रोक लगा दी गई है। साथ ही कहा है कि 2019 की अधिसूचना पर राज्य कार्रवाई करे।
अब श्री सम्मेद शिखर तीर्थ स्थल ही रहेगा। उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। तीर्थ क्षेत्र में कोई निर्माण कार्य नहीं होगा और स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां होटल, ट्रैकिंग और नॉन वेज पर भी रोक रहेगी। तय हुआ है कि एक बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें दो लोग जैन समाज, स्थानीय प्रतिनिधि और सरकार के प्रतिनिधि होंगे. जो भी निर्णय करना होगा बोर्ड करेगा।

केंद्र सरकार ने पारसनाथ हिल्‍स (जहां सम्‍मेद शिखरजी स्थित है) पर सभी गतिविधियों को रोकने का फैसला किया है। इसके साथ ही राज्‍य से इस स्‍थल पर शराब के सेवन, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को दूषित करने या पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया है। पारसनाथ मामले में केंद्र सरकार ने समिति बनाई है। साथ ही कहा है कि राज्य सरकार समिति में जैन समुदाय से दो सदस्य और स्थानीय जनजातीय समुदाय से एक सदस्य शामिल करे।

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गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित सम्मेद शिखरजी को जैनियों के दिगंबर और श्वेतांबर, दोनों संप्रदायों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है। सम्‍मेद शिखर के मुद्दे पर राजस्‍थान में भूख हड़ताल पर बैठे जैन संत मुनि सुग्‍येय सागर के निधन के बाद विरोध और तेज हो गया था। यूपी, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान के अलावा मुंबई और राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली के इंडिया गेट पर भी प्रदर्शन हुए थे।

इससे पहले, आज झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इसके 2019 के नोटिफिकेशन पर उपयुक्‍त कदम उठाने का आग्रह किया था। उन्‍होंने यह भी लिखा था कि राज्‍य की 2021 की टूरिज्‍म पॉलिसी, जिसमें इस धर्मस्‍थल के बेहतर प्रबंधन के लिए एक मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का प्रावधान था, का भी जैन समाज द्वारा विरोध किया जा रहा है। पत्र में कहा गया था कि राज्‍य के पर्यटन सचिव की अगुवाई वाले बोर्ड में जैन समाज की ओर से चुने गए छह अशासकीय सदस्‍य होंगे। समुदाय का विरोध पारसनाथ हिल्‍स, जहां यह धर्मस्‍थल स्थित है, को ईको टूरिज्‍म एरिया घोषित करने को लेकर था। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को यह पत्र मंत्रालय द्वारा राज्य को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करने के लिए कहे जाने के बाद आया। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मेत्री भूपेंद्र यादव ने एक मेमो जारी किया जिसमें कहा गया कि पारिस्थितिकी तौर पर हानिकारक गतिविधियों को तुरंत रोक दिया जाए। केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा था कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा कुछ नहीं किया जाएगा।

 

 

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