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Saturday, October 17, 2026
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उसके हाथ पर गुदवाया हुआ हो मेले में मेरा नाम

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-सुनीता करोथवाल-

sunita karothwal
सुनीता करोथवाल लेखिका एवं कवयित्री

बहुत खूबसूरत हो तुम
पर मेरे वाले से ईंच भर कम कातिल हैं
तुम्हारी तम्बाकू सी धुआँधार आँखें

तुम्हारी आँखों में सुल्फे की चिलम सा एक ही रंग है
और उसकी आँखें खेत के बीच बहती नदी हैं
हर बार मेरे मन को बागों सा सींचती हैं

हाँ एक बात की जलन तो है ही तुमसे
प्रेमी को तुम्हारे जैसा तो कम से कम होना ही चाहिए
जो प्रेमिका के कहने पर बढ़ा ले अपनी मूँछें
पहन ले कुरते के साथ पगड़ी
बिखर जाए मेरे चाँदी के नाड़े की आवाज पर
और थिरक ले बेपरवाह होकर
किसी पड़ोस के ब्याह में ढोलक की ढम ढम पर

समेट ले मेरे भीतर का पसरा हुआ सारा गांव
समझ ले मेरे गाए हुए सारे लोकगीत

उसे पसंद हो मेरा जंगली होना
और खेत से लौटते हुए
ले आए एक सरसों का फूल
कभी कपास की पहली गुलाबी कतरन
मेरी हथेली पर रखी जाए
गेहूँ के दिनों में कंडाई का नाजुक पीला फूल
नालियों पर उगी खट्टी मीठी
खरपतवार के जामुनी फोहों से उसकी मुट्ठी भरी हो
सिर्फ मेरे लिए

उसके हाथ पर गुदवाया हुआ हो मेले में मेरा नाम
और जिस दिन मैं जोई कंठी पहनूं
वह संदूक से मुरकियों की फरमाइश करे
मेरी चुनरी के रंग का कुरता पहन
बस जिंदगी को देहात कर दे।

सुनीता करोथवाल

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