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Friday, October 16, 2026
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तुम लौट आई हो न जाने कितने रूपों में…

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फोटो अखिलेश कुमार

-रामस्वरूप दीक्षित-

ram swaroop dixit
रामस्वरूप दीक्षित

अहसास

तुम्हारे
साथ होने का अहसास
बनाए रखता है
मेरे साथ
धरती के हरे होने
पहाड़ों के इतराने
नदियों के बहने
और
आसमान के खुशी से
और और नीले होते जाने का अहसास

कंधों पर उड़कर बैठती तितलियां
हंसते हुए फूल
चहकती गौरैयां
ओस से नहाकर
ताजातरीन होती घास
कोयल की कूक
भंवरों के गीत
गरीब के चूल्हे पर
फूलती हुई रोटियां
और बात बेबात
खिलखिलाकर हंसती हुई स्त्रियां
दिलाती हैं अहसास
कि तुम जाकर भी गई नहीं हो
लौट आई हो
न जाने कितने रूपों में

रामस्वरूप दीक्षित

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