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Sunday, October 18, 2026
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याद

poem ak
फोटो साभार अखिलेश कुमार

-रामस्वरुप दीक्षित-

ram swaroop dixit
रामस्वरूप दीक्षित

तुम मुझे
याद करती हो

वैसे ही
जैसे पेड़ करता है
उस पर रहने वाली चिड़ियों को

खेत करता है
किसान के घर पहुंची फसल को

फूल करता है
भँवरे को

गरमी के दिनों में
नदी करती है धार को

हवा करती है
खुशबू को

कूची करती है
रंगों को

व्याकरण करती है
शब्दों को

एक घर करता है
उसमें रहने वालों को

कान करते हैं
प्रिय की मधुर आवाज को

पपड़ाईं हुई धरती
बादलों को

तुम्हारा याद करना
मुझ तक पहुंचता है
ठीक वैसे ही
जैसे पहुंचती है
एक बेनाम चिट्ठी
सही पते पर
रामस्वरुप दीक्षित

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