28 C
Kota
Friday, October 16, 2026
Home Literature आया करो न…

आया करो न…

ganv
फोटो साभार नीलम

-मुकेश कुमार सिन्हा-

mukesh kumar sinha
मुकेश कुमार सिन्हा

इन दिनों सपनों में
गांव के घर वाले दरवाजे
बराबर चर्र से खुलते हैं

और तो और
खिड़कियों के पल्ले भी
छमक कर बुलाते हैं

इनदिनों
गांव-ओसरा-डगर-पोखर
सब के सब कह रहे
आया करो न

इनदिनों
सपनों को जीना प्यारा लगता है
इनदिनों शायद, शहर की खिड़की में
हवाएं गांव से ही आ रही होगी
… है न!
मुकेश कुमार सिन्हा

Advertisement
1 Comment
Oldest
Newest Most Voted