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Thursday, October 15, 2026
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मन से जीता वह जीत गया

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फोटो साभार अखिलेश कुमार

–डाँ आदित्य कुमार गुप्ता

aditya kumar
डाँ आदित्य कुमार गुप्ता

यह वक़्त किसी को ठहरा ना,
देखा है आया बीत गया ।
मन से जो हारा हार गया,
मन से जीता वह जीत गया।।

दुख सुख तो जीवन के क्रम हैं,
ये आते जाते रहते हैं ।
अवसान-उदय को जग वाले,
रोकर हँसकर के सहते हैं ।।

जो दिखे आज घट भरा-भरा,
कल आने पर वह रीत गया।
मन से जो हारा हार गया,
मन से जीता वह जीत गया।।1।।

सबका मन झूला करता है ,
नित द्वन्द्वों के हिंदोलों पर।
कुछ शोलों को सुलगाते हैं,
कुछ सलिल डालते शोलों पर।।

संयोगों और वियोगों में ,
मन भटक-भटक भरमाता है।
चिंताओं का गर्जन-तर्जन,
बहु प्रश्नों को गरमाता है ।।

जब घिरी निराशा इस मन में,
समझो खुशियों का गीत गया।
मन से जो हारा हार गया ,
मन से जीता वह जीत गया।।2।।

मन में जब उमड़े मोद- सरित,
तब वह भी बहने लगता है ।
जब पीड़ाओं के क्षण आते,
पीड़ा में दहने लगता है।।

जब लक्ष्यों से होती दूरी,
खो जाती साँझें सिंदूरी।
तब आहें यह मन भरता है ,
चेहरे पर दिखती मजबूरी ।।

खोया जब साहस इस मन का,
संचित साहस-धन बीत गया।
मन से जो हारा हार गया,
मन से जीता वह जीत गया।।3।।

इसलिए कहा है विज्ञों ने,
ना कष्टों से घबराना है।
संकट आएंगे जीवन में,
पर आगे बढ़ते जाना है ।।

मेहनत का फल तो मिलता है,
मेहनत बेकार नहीं होती।
जो पूरे मन से यत्न करें,
उनकी ना हार कहीं होती।।

दुख सदा सदा ना रहता है,
कुछ क्षण को आया बीत गया।
मन से जो हारा हार गया,
मन से जीता वह जीत गया।।4।।
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डाँ आदित्य कुमार गुप्ता , कोटा ।

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