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Friday, October 16, 2026
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पत्थर

-प्रकाश केवडे-

prakash kevde
प्रकाश केवडे

पत्थरों की बस्ती
से गुजरते एक
पत्थर पर बैठकर
पत्थरों से पूछा

चार पत्थरों ने कहा
इंसान ने हमें समझा क्या
जब उठाया फेंका
किसी का सर
किसी कांच को तोडा

कुछ बिरले होते हैं
हमारी कीमत जानते हैं
कभी हमें मील का पत्थर
तो कभी शिलालेख
बना संभालते हैं

हम में से कोई
किस्मत वाला मूरत
बनता है और
पत्थर दिल इंसान
से उम्र भर पूजा
जाता है।

फिर भी मुस्कुराते
खुशहाल रहते हैं
क्योंकि हमसे बने
मकानों में इंसान
रहते हैं।

रचियता प्रकाश केवडे

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