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Saturday, October 17, 2026
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कितनी ख़ुशियों भरा है ईद का दिन। सब दिनों से जुदा है ईद का दिन।।

ग़ज़ल

शकूर अनवर

shakoor anwar
शकूर अनवर

कितनी ख़ुशियों भरा है ईद का दिन।
सब दिनों से जुदा है ईद का दिन।।
*
जैसे अब्रे-बहार* का झोंका।
जैसे बादे-सबा* है ईद का दिन।।
*
है सराबोर रंगो-ख़ुशबू से।
फूल जैसे खिला है ईद का दिन।।
*
न कोई वाक़िया* न पसमंज़र*।
सिर्फ़ शुक्र ए ख़ुदा है ईद का दिन।।
*
क्यूॅं न मग़रूर हो ये ईद की शब।
ख़त्म इस पर हुआ है ईद का दिन।।
*
तुम भी ख़ुशियाँ समेट लो “अनवर”।
लो चला है चला है ईद का दिन।।
*

अब्रे-बहार*बसंत ऋतु के बादल
बादे-सबा*सुबह की ठंडी हवा
वाक़िया*घटना
पसमंज़र*पृष्टभूमि

शकूर अनवर
9460851271

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