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Thursday, October 15, 2026
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एक और इतिहास रचने की तैयारी में इसरोः सूरज के सफर पर आदित्य एल 1

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-द ओपिनियन-

चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतारने के बाद भारत ने अंतरिक्ष में एक और उपलब्धि की ओर कदम बढा दिए हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने शनिवार को देश के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल 1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसका प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। इसके बाद उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। अब अगले 16 दिन तक आदित्य एल 1 पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा। चंद्रयान-3 मिशन की तरह एक-एक कर ऑन बोर्ड प्रोपल्शन का प्रयोग कर इसे धीरे-धीरे पृथ्वी की अन्य कक्षाओं में भेजा जाएगा।. पांच चरण के प्रोपल्शन के बाद इसे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर ले जाया जाएगा.।

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आदित्य एल1 125 दिन का सफर कर सूर्च के लांग्रेजियन बिंदु एल1 पर पहुंचेगा। जहां इसको स्थापित किया जाएगा। यह पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है। लांग्रेजियन बिंदु वह स्थान है जहां पृथ्वी व सूर्य का गुत्वाकर्षण बल संतुलित हो जाता है और सेंट्रिफ्यूगल फोर्स बन जाता है। ऐसे में इस जगह पर अगर किसी ओबजेक्ट यानी वस्तु को रखा जाता है तो वह आसानी से दोनों के बीच स्थिर रहती है। सूर्य और पृथ्वी के बीच ऐसे पांच बिंदु हैं। वह बिंदु जहां से आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करेगा वह एल1 बिंदु है। आदित्य-एल1 में कुल सात पेलोड हैं। चार पेलोड्स सूरज को सीधे तौर पर देखेंगे और तीन पेलोड्स लैगरेंज पॉइंट 1 पर पार्टिकल्स और फील्ड की स्टडी करेंगे।
आदित्य-एल1 का प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-एक्सएल की मदद से किया गया। यह इसकी 59 वीं उडान थी। मीडिया में आई खबरों के अनुसार पीएसएलवी को किसी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने में 25 मिनट लगते हैं, लेकिन यहां आदित्य-एल1 को यहां तक पहुंचने में 63 मिनट लगे। ऐसे में सवाल उठता है कि इस देरी की वजह क्या है। आज इसरो ने सबसे पहले अलग-अलग स्तर के सेपरेशन के बाद धरती की सबसे निचली कक्षा में अपने सन मिशन को स्थापित किया है। यह मिशन भी एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। इसके अध्ययन से मिलने वाली जानकारी सूर्य के बारे में एक कई जानकारियों का खजाना खेलेगा। हमारे वैज्ञानिक नई जानकारियों व अनुभवों से समृद्ध होंगे।

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