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Thursday, October 15, 2026
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सामाजिक बंधनों से मुक्ति की चाह जगाई लाछी ने

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-संजय चावला-

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संजय चावला

कोटा। कोटा के यूआईटी ऑडिटोरियम में पांच दिवसीय युवा नाट्य समारोह के तीसरे दिन शुक्रवार शाम को कोटा के कला प्रेमियों को कला का एक नया अंदाज देखने को मिला। ं मौका था विजयदान देथा के प्रसिद्ध नाटक केंचुली के मंचन का। इसमें कलाकारों की विविध भूमिकाओं की प्रस्तुति इतनी शानदार रही कि दर्शक इसमें खो गए। वे ऐसा महसूस कर रहे थे कि घटनाक्रम उनके सामने घट रहा है। जब प्रस्तुति खत्म हुई तो सभागार में मौजूद सभी दर्शक खडे होकर काफी देर तक तालियां बजाते रहे। दर्शकों की यही करतल ध्वनि इस बात का प्रमाण थी कि दास्तॉं गोई विधा को भी इतनी खूबसूरती से प्रस्तुत किया जा सकता है कि दर्शक एक एक डॉयलाग के साथ घटनाक्रम से बंधता चला जाता है। इस प्रस्तुति को देखने के बाद गांव के वे पुराने दिन याद आ गए जब चौपाल पर कुछ ऐसे लोग होते थे जो कि अपनी किस्सा गोई से वहां बैठे लोगों को बांधे रखते थे।

विजयदान देथा ने अपनी कलम से जो रचा है उसे शुभम आमेटा की टीम ने चार सूत्रधारों की मदद से मंच पर जीवंत कर दिया। इस प्रस्तुति में मुख्य पात्र लाछी की कहानी समाज की उन महिलाओं जैसी है जिन्हे प्रेम के बदले निराशा हाथ लगती है। वे सामाजिक बंधनों से बंधी हैं और उस जकड़न से आज़ाद होना चाहती हैं। शुभम आमेटा के निर्देशन में प्रभावी अभिनय से दर्शकों में समानानुभूति का भाव जाग उठा तथा पूरे प्रस्तुतीकरण के दौरान दर्शक दीर्घा में सन्नाटा पसरा रहा। नाटक में तीन भजनों और तीन लोक गीतों का प्रभावपूर्ण उपयोग किया गया। दर्शकों ने राहुल जोशी के प्रकाश सञ्चालन की भी तारीफ की। इसके अलावा दिग्पाल राठौड़, सुनील सैनी, महेश दान, शुभम आमेटा तथा अपूर्व गौतम का अभिनय तथा डायलॉग डिलीवरी दमदार थी।

इस नाटक की खासियत यह थी कि इसके सभी कलाकार अलग-अलग जगह और पृष्ठभूमि के थे। लेकिन उनके अभिनय के साथ संवाद अदायगी, भाषा और बातचीत का लहजा बिल्कुल एक सा था। जबकि यदि देखा जाए तो जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर की बोलचाल और शब्दों के उच्चारण में काफी विविधता है। लेकिन एक घंटे से अधिक समय तक इस दास्तां गोई के दौरान यही लगा कि चारों सूत्रधार एक ही टीम है। भूमिका और अभिनय के लिहाज से सभी कलाकार एक दूजे से बढकर थे। यह तो जब कलाकारों का परिचय कराते समय उनके शहरों का भी उल्लेख किया गया तो मालूम पडा कि ये सभी अलग जगह से हैं। लेकिन उनका तालमेल कठिन अभ्यास का ही परिणाम था।मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व महापौर महेश विजय उपस्थित थे।

शनिवार को नेक चर का मंचन होगा

समारोह संयोजक अभिषेक तिवाड़ी ने बताया की शनिवार शाम को अंतिम कडी में डारय द्वारा लिखित नाटक नेक चर का मंचन होगा। यह नाटक वैवाहिक स्त्री पुरुष संबंधों के खोखलेपन तथा साथ होने का मुखौटा ओढ़े सुसंस्कृत समाज के दोगलेपन पर कटाक्ष करता है। इस मूल इटैलियन नाटक को भारतीय सन्दर्भ में रूपांतरित किया गया है।

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