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Thursday, October 15, 2026
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महिला आरक्षण बिल पर फिर सियासी घमासान

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photo courtesy social media
महिला आरक्षण बिल को लेकर फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष प्रतिनिधित्व और जनगणना की मांग पर अड़ा है, जबकि बीजेपी इसे अपनी राजनीतिक बढ़त का जरिया बना रही है। अब सबकी नजर संसद के विशेष सत्र पर टिकी है।
-विपक्ष की चिंता और राहुल गांधी का आरोप

-देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

एक बार फिर महिला आरक्षण बिल चर्चा के केंद्र में है। विपक्षी दलों को चिंता है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इस बिल को संसद में पास कराकर अपनी राजनीतिक बढ़त और मजबूत करना चाहती है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद के विशेष सत्र से एक दिन पहले, 15 अप्रैल को एक वीडियो जारी कर बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह इस बिल को मनमाने तरीके से पास कराना चाहती है ताकि केंद्र की सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रख सके। राहुल गांधी ने साफ कहा कि कांग्रेस इस बिल का विरोध तब तक करेगी, जब तक इसमें दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता।

सीटों के विस्तार और जातिगत जनगणना की मांग

सत्ताधारी बीजेपी लोकसभा सीटों के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। वहीं कांग्रेस और राहुल गांधी की मांग है कि इस प्रक्रिया में राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाए। साथ ही, जातिगत जनगणना कराकर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग को उनकी जनसंख्या के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। राहुल गांधी का आरोप है कि बीजेपी नए-नए राजनीतिक हथकंडे अपनाकर लंबे समय तक सत्ता में बने रहना चाहती है, जिसका कांग्रेस विरोध करेगी।

विपक्ष की एकजुटता पर सवाल

यह सवाल भी उठता है कि क्या राहुल गांधी के इस विरोध को अन्य विपक्षी दलों का पूरा समर्थन मिलेगा? 2014 के बाद से राहुल गांधी लगातार बीजेपी की नीतियों का विरोध करते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बीजेपी ने लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल की है। यदि विपक्ष एकजुट होकर कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा होता, तो संभव है कि 2019 में बीजेपी की वापसी इतनी मजबूत न होती।

2019 से 2024 तक: कांग्रेस के लिए छूटे मौके

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने नोटबंदी, जीएसटी और कोरोना महामारी के दौरान अव्यवस्था जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उस समय ऐसा लग रहा था कि बीजेपी को नुकसान हो सकता है, लेकिन पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। इसके बाद राहुल गांधी ने हार नहीं मानी और 6000 किलोमीटर लंबी भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उन्होंने “आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ” का नारा भी दिया। इसका असर 2024 के चुनाव में दिखा, जहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन उसने गठबंधन के सहारे सरकार बना ली।

बीजेपी की बढ़त और कांग्रेस की चुनौतियां

आज स्थिति यह है कि बीजेपी न सिर्फ मजबूत हुई है, बल्कि विपक्ष की कमजोरियों को भी समझ चुकी है। वहीं कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके पास ऐसे रणनीतिकारों की कमी दिखाई देती है, जो बीजेपी की चुनावी रणनीति को समझ सकें। कांग्रेस के पास 2019 और 2024 में सत्ता में वापसी का बड़ा मौका था, लेकिन आंतरिक कमजोरियों और गलत रणनीतियों के कारण वह इन अवसरों का लाभ नहीं उठा सकी।

विशेष सत्र पर टिकी देश की नजर

16 अप्रैल से शुरू हो रहे महिला आरक्षण बिल पर संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र पर पूरे देश की नजर है। यह सत्र तय करेगा कि आने वाले समय में देश की राजनीति किस दिशा में जाएगी। यदि बीजेपी इस बिल को पास कराने में सफल होती है, तो यह भी सवाल उठेगा कि क्या देश में समय से पहले लोकसभा चुनाव हो सकते हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

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