29.7 C
Kota
Thursday, October 15, 2026
Home Politics and Current Affairs केरल में कांग्रेस की जीत और मुख्यमंत्री पर सस्पेंस

केरल में कांग्रेस की जीत और मुख्यमंत्री पर सस्पेंस

congress
-देवेंद्र यादव-
devendra yadav
देवेन्द्र यादव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस की राजनीति में उनका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पार्टी के भीतर आज भी कुछ ऐसे राजनीतिक समीकरण और नेटवर्क मौजूद हैं, जिन्हें कई लोग “अहमद पटेल स्कूल” की राजनीति मानते हैं। केरल की मौजूदा स्थिति को इसी नजरिये से देखा जा रहा है।

केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली, लेकिन इसके बावजूद पार्टी अब तक मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं कर पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को माना जा रहा है। वे लंबे समय से केरल की राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत करते रहे हैं और अब मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रमुख दावेदारों में गिने जा रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान भी इस मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहते। वजह साफ है। केसी वेणुगोपाल केवल केरल के नेता नहीं रह गए हैं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में वे कांग्रेस संगठन के भीतर बेहद प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे हैं।

असल में केसी वेणुगोपाल की राजनीतिक ताकत 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तेजी से बढ़ी। जब राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट के साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ने का फैसला किया, तब वेणुगोपाल की भूमिका काफी अहम बताई गई। वायनाड से राहुल गांधी की रिकॉर्ड जीत के बाद दिल्ली की राजनीति में भी वेणुगोपाल का कद अचानक बढ़ गया।

उस समय वे खुद लोकसभा चुनाव नहीं लड़े, लेकिन बाद में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया। इसके साथ ही उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय संगठन महासचिव बनाया गया। यह पद पार्टी के भीतर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि संगठन से जुड़े बड़े फैसलों में इसकी सीधी भूमिका होती है।

2021 के केरल विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी नेताओं के बीच खींचतान खुलकर सामने आई। उस विवाद का नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा और पार्टी सत्ता से दूर रह गई। इसके बाद भी केसी वेणुगोपाल संगठन में लगातार मजबूत होते गए।

अब 2026 में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद फिर वही सवाल खड़ा हो गया है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं, लेकिन वेणुगोपाल की दावेदारी सबसे ज्यादा चर्चा में है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला आसान नहीं दिख रहा।

दिलचस्प बात यह है कि 2019 से पहले राष्ट्रीय राजनीति में केसी वेणुगोपाल का नाम केरल के बड़े कांग्रेस नेताओं में प्रमुखता से नहीं लिया जाता था। उस दौर में केरल कांग्रेस की राजनीति करुणाकरण, ए. के. एंटनी, ओमन चांडी, रमेश चेन्निथला और एम. एम. हसन जैसे नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती थी। इनमें से कई नेता मुख्यमंत्री भी रहे और लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर उनका प्रभाव रहा।

लेकिन राहुल गांधी के वायनाड आने के बाद तस्वीर तेजी से बदली। केसी वेणुगोपाल दिल्ली और केरल, दोनों जगह कांग्रेस नेतृत्व के बेहद करीबी नेताओं में शामिल हो गए। यही वह दौर था जब उनकी राजनीतिक ताकत लगातार बढ़ती चली गई।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि केरल का मुख्यमंत्री कौन बनेगा। बड़ा सवाल यह भी है कि कांग्रेस के भीतर फैसले लेने वाली असली ताकतें कौन हैं और पुराने राजनीतिक नेटवर्क आज भी कितने प्रभावशाली हैं। केरल की राजनीति फिलहाल इसी बहस के केंद्र में है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

Advertisement