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Friday, October 16, 2026
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संसद से सड़क तक गूंजी ‘छात्रों की आवाज’, क्या सरकार पर बढ़ेगा दबाव?

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photo courtesy social media

-वर्षाकालीन सत्र के पहले ही दिन पेपर लीक, छात्र आंदोलन और विपक्ष के हमलों ने गर्माया सियासी माहौल

-देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

20 जुलाई को जैसे ही संसद का वर्षाकालीन सत्र शुरू हुआ, वैसे ही पेपर लीक के मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक छात्रों की आवाज गूंजने लगी। एक ओर लंबे समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से आए छात्र और युवा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। संसद का सत्र शुरू होते ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर कूच कर गए। दूसरी ओर संसद परिसर में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पेपर लीक और राम मंदिर चंदा मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए।19 जुलाई को पप्पू यादव ने बिहार में पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के साथ संवाद किया था। इसके बाद वह सीधे दिल्ली पहुंचे और 20 जुलाई को संसद परिसर में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि वह लंबे समय से राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे छात्र हितों के मुद्दों को बिहार से लेकर संसद तक लगातार उठा रहे हैं।

इधर, जंतर-मंतर पर बैठे छात्रों और युवाओं ने 20 जुलाई को जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का उत्साह देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संसद की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी। जैसे-जैसे छात्र संसद की ओर बढ़े, पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए। सरकार की ओर से आंदोलनकारी छात्र नेताओं से बातचीत भी की गई।

हालांकि, इस वार्ता के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं। क्या सरकार आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों को मानेगी? क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे? क्या नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएंगे।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग की लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़ी आलोचना की। अब यह देखना होगा कि विपक्ष की इस आलोचना का सरकार पर कोई राजनीतिक या नीतिगत असर पड़ता है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार से बातचीत के बाद छात्र अपना आंदोलन वापस लेते हैं या उसे और तेज करते हैं।

देश की निगाहें अब संसद के वर्षाकालीन सत्र पर टिकी हैं। दूसरी ओर आम जनता की नजर आसमान पर भी है। मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे समय में संसद के भीतर राजनीतिक मुद्दों की बारिश हो रही है, जबकि खेतों में बादलों का इंतजार है।

विपक्ष ने केंद्र सरकार के सामने पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी और किसानों सहित कई मुद्दे मजबूती से रख दिए हैं। अब देखना यह होगा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी इन मुद्दों का किस तरह जवाब देती है और संसद के भीतर होने वाली बहस किस दिशा में जाती है।

राजनीतिक दृष्टि से राहुल गांधी के संसद में होने वाले भाषण पर भी सभी की नजर रहेगी। राहुल गांधी ने 17 जून को अपने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत राजस्थान के कोटा से की थी, जो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संसदीय क्षेत्र है। उन्होंने उसी स्थान पर छात्रों से संवाद किया था, जहां से ओम बिरला का निजी आवास भी निकट है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी संसद के भीतर भी छात्रों के मुद्दों को उसी मुखरता से उठाते हैं और उनकी आवाज सदन में कितनी प्रभावी ढंग से गूंजती है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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