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Friday, October 16, 2026
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‘यह देश मेरा घर है किराए का नहीं है’

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-ग्रेटर कोटा प्रेस क्लब के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में गीत और कविताओं की बौछार

कोटा । ग्रेटर कोटा प्रेस क्लब की ओर से सांस्कृतिक सामाजिक रचनात्मक कार्यक्रमों की श्रृंखला में रविवार को अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नए कोटा के केशवपुर स्थित एमडी मिशन कॉलेज सभागार में हुए इस कवि सम्मेलन को देश विदेश में अपनी कविताओं शायरी से शिक्षा नगरी कोटा का नाम बुलंद करने वाले कवियों की कविताओं ने राष्ट्रीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के यथार्थ हालात पर सटीक सार्थक अभिव्यक्ति से सराबोर कर दिया।

देशभर में कवि सम्मेलन के मंचों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले ख्यात नाम कवि जगदीश सोलंकी ने ‘तुम रहनुमा हो रोशनी के हम अंधेरों के पाले हुए हैं, जिसको समाधान समझा वह ताबीज डाले हुए हैं, जैसी उत्कृष्ट उम्दा कविताओं की प्रस्तुति दी तो सभागार तालिया की गड़गड़ाहट और वंस मोर से गूंज उठा । कोटा हाड़ोती के जाने-माने शिक्षाविद एमडी मिशन एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामकुमार दाधीच के मुख्य आतिथ्य में हुए इस कवि सम्मेलन की सार्थकता को ऊंचाई देने के लिए शहर के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित पत्रकार साहित्य प्रेमी बुद्धिजीवी बतौर श्रोता बड़ी संख्या में मौजूद थे। दोपहर 12बजे से शुरू होकर शाम 6:00 बजे तक चले कवि सम्मेलन की अध्यक्षता ग्रेटर कोटा प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुनील माथुर ने की।

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अपनी शायरी से देश विदेश में पहचान बनाने वाले जाने-माने शायर कुंवर जावेद ने ‘ सूरज हूं मुझको डर किसी साये का नहीं है। यह देश मेरा घर है किराए का नहीं है।, तथा मुश्किल घड़ी है आओ देश को बचाएं जैसे उम्दा शेर और तरन्नुम में बेहतरीन गजलें सुनाकर माहौल को देशभक्ति से लबरेज कर दिया। अपनी साहित्यिक रचना विशिष्ट शैली से राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित जाने माने रचनाकार अतुल कनक के व्यंग्यात्मक काव्यात्मक टिप्पणियों के साथ सफल संचालन ने इस कवि सम्मेलन को ऐतिहासिक बना दिया। एक से एक बेहतरीन कवियों की हिंदी और राजस्थानी हाड़ोती भाषा की रचनाएं श्रोताओं के होठों की गुनगुनाहट बनकर दिल तक उतरती गई।

राजस्थानी हाडोती भाषा के अद्भुत शिल्प शाब्दिक कसावट, लोक संस्कृति परंपरा के लौकिक सौंदर्य संवेदना को अपने गीतों कविताओं में अभिव्यक्त करने वाले देश के विख्यात कवि दुर्गा दान सिंह गौड़, मुकुट मणिराज, अंबिका दत्त और विश्वामित्र दाधीच ने कवि सम्मेलन को साहित्य साधना के शिखर तक पहुंचाया। महेंद्र नेह, रामनारायण हलधर, किशन वर्मा, निशा मुनि गौड़, अखिलेश अखिल, शरद गुप्ता, कृष्णा कुमारी, अनीता वर्मा और राजेंद्र पवार की कविताओं पर भी श्रोताओं ने दिल खोलकर दाद दी।

 

 

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