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Thursday, October 15, 2026
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अभिमान है मुझे सत्य के प्रति स्नेह का

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अखिलेश कुमार
विभीषण

-प्रकाश केवडे-

prakash kevde
प्रकाश केवडे

था मैं रावण का सच्चा
हित चिंतक
था उसकी विद्वता का घोर प्रशंसक
था मैं उसकी अपार शक्ति का अनुशंसक।

नहीं था उसका अनुयायी
चाकर कभी
नहीं रहा उसके पापों में
सहभागी कभी
नहीं रहा उसका झूठा
प्रशंसक कभी ।

ज्ञात था रावण का
हित अहित मुझे
ज्ञात थी श्रीराम की
अपरिमित शक्ति मुझे
ज्ञात था श्रीराम
शरण में अगर जाऊंगा
ज्ञात था तो सदा
धोखेबाज कहलाउंगा ।

रावण के शासन का अंत
होना ही था
मुझे ही भेदी का कलंक
सदा ढोना ही था
नहीं दुख मुझे भ्रात
द्रोह का
अभिमान है मुझे सत्य
के प्रति स्नेह का।

रचियता प्रकाश केवडे

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