29.5 C
Kota
Thursday, October 15, 2026
Home Literature किसे आवाज़ दूॅं मैं दुनिया वालो। भॅंवर में है मेरी कश्ती निकालो।।

किसे आवाज़ दूॅं मैं दुनिया वालो। भॅंवर में है मेरी कश्ती निकालो।।

ghazal of shakoor anwar

ग़ज़ल

शकूर अनवर

शकूर अनवर
किसे आवाज़ दूॅं मैं दुनिया वालो।
भॅंवर में है मेरी कश्ती निकालो।।
*
ये बिजली देखना गिर कर रहेगी।
तुम अपने आशियाने को बचालो।।
*
अब आगे ऑंसुओं का मरहला* है।
अभी कुछ देर है हॅंसलो हॅंसालो।।
”
अरे ऐ ज़ालिमो, रोको तबाही।
अरे ऐ क़ातिलो, हथियार डालो।।
*
मेरी तन्हाई देगी बददुआऍं।
मेरी महफ़िल से उठकर जाने वालो।।
*
यहाॅं इफ़रात होगी मछलियों की।
यहाॅं ठहरो यहीं पर जाल डालो।।
”
लहू इंसान का सस्ता है “अनवर”।
इसे जब जी में आये तुम बहालो।।
*
शकूर अनवर
मरहला* पड़ाव
इफ़रात*अधिकता

Advertisement