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Thursday, October 15, 2026
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ज़िंदगी तो सवाल करती रही। सिर्फ़ देने पड़े जवाब मुझे।।

shakoor anwar 00
शकूर अनवर

ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

जुस्तजू ने दिए सराब मुझे।
जिंदगी भर मिले हैं ख़्वाब मुझे।।
*
दशतो सहरा कभी कभी जंगल।
हर क़दम पर मिले अज़ाब मुझे।।
*
ज़िंदगी तो सवाल करती रही।
सिर्फ़ देने पड़े जवाब मुझे।।
*
मैं रहा दीन का न दुनिया का।
शायरी ने किया ख़राब मुझे।।
*
अब तो खाने लगे दरो दीवार।
अब तो पीने लगी शराब मुझे।।
*
इन रिसालों में क्या पढूॅं “अनवर”।
अपने चेहरे की दे किताब मुझे।।
”

जुस्तजू* तलाश
सराब*मरीचिका
अजाब* कष्ट पीड़ाएं
दीन का* मजहबी
रिसालों* पत्रिकाओं

 

शकूर अनवर

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