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Friday, October 16, 2026
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देता है दिल को ज़ख़्म हमेशा नये नये। माना वो मेरा दोस्त पुराना ज़रूर है।।

ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

ये दिल मुहब्बतों का ख़ज़ाना ज़रूर है।
लेकिन किसी के नाम लुटाना ज़रूर है।।
*
मंज़िल तुझे हयात* की पाना ज़रूर है।
दुनिया को छोड़ – छाड़ के जाना ज़रूर है।।
*
जाने भी दे बहार का मौसम गुज़र गया।
आने भी दे ख़िज़ाओं को आना ज़रूर है।।
*
मरने का कुछ सबब* तो मेरे चारागर* बता।
बरहक़ है मौत* फिर भी बहाना ज़रूर है।।
*
देता है दिल को ज़ख़्म हमेशा नये नये।
माना वो मेरा दोस्त पुराना ज़रूर है।।
*
नफ़रत को इस वतन से मिटाने के वास्ते।
कुछ तल्ख़ियों* को आज भुलाना ज़रूर है।।
*
अनवर फ़ज़ा* में ख़ून के धब्बे हैं जा ब जा*।
मंज़र* नज़र में यूॅं तो सुहाना ज़रूर है।।
*

हयात*ज़िंदगी,जीवन
सबब*कारण
चारागर*डॉक्टर चिकित्सक
बरहक़ है मौत*मृत्यु निश्चित है
तल्ख़ियों*कड़वाहटों
फ़ज़ा*वातावरण
जा ब जा* जगह-जगह
मंज़र*दृश्य

शकूर अनवर
9460851271

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