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Friday, October 16, 2026
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न तेरा हुआ गर तो क्या इसमें हैरत हुआ है सगा कब ज़माना किसी का

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फोटो अखिलेश कुमार

-मधु मधुमन-

madhu madhuman
मधु मधुमन

बिना बात ही रूठ जाना किसी का
कहाँ तक सहे कोई नखरा किसी का

हैं चेहरे पे चेहरे लगाए हुए सब
हो मालूम कैसे इरादा किसी का

न तेरा हुआ गर तो क्या इसमें हैरत
हुआ है सगा कब ज़माना किसी का

ये कैसी अजब त्रासदी है जहां की
मुसीबत किसी की है मौक़ा किसी का

जब उसकी अदालत में पेशी पड़ेगी
नहीं काम आएगा रुतबा किसी का

यही इक दुआ है हमारी तो या रब
न उजड़े कभी भी घरौंदा किसी का

बनेगा सहारा तुम्हारा भी कोई
अगर तुम बनोगे सहारा किसी का

कोई लाख कर ले जतन चाहे ‘मधुमन ‘
नहीं ज़ोर क़िस्मत पे चलता किसी का

मधु मधुमन

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