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Thursday, October 15, 2026
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लिखा उन्होंने

-रामस्वरूप दीक्षित-

ram swaroop dixit
रामस्वरूप दीक्षित

लिखा उन्होंने मुझे
अपने पत्र में
कि अब कैसा है
दरवाजे का नीम
उससे पहले जैसी ही झरती हैं पत्तियां या नहीं
उसका तना तो
अब पहले से मोटा हो गया होगा
उस पर बैठने वाली चिड़ियाँ
अब भी उस पर बैठती हैं
या उन्होंने खोज लिया है
कोई दूसरा घर
बाबा जिस डाल को झुकाकर
तोड़ते थे अपने लिए दातुन
वह तो अब ऊपर हो गई होगी
अब उनके लिए
पेड़ पर चढ़कर तोड़ना पड़ती होगी
और पेड़ पर वे किसी को चढ़ने नहीं देते होंगे
अब उनकी दातुन कहाँ से आती है
पत्तियों को बुहारते बुहारते
दर्द होने लगता होगा मां की कमर में
क्योंकि जितने वर्ष चढ़ी होगी
नीम की उमर
उतने वर्ष बुढ़ाई होंगी मां
यह सब उन्होंने
हमसे बहुत दूर
अमेरिका में रहते लिखा
पत्र में मेरा पता भर था
पढ़ने के बाद
मैंने वह पत्र
चुपचाप
नीम के पेड़ के पास रख दिया

-रामस्वरूप दीक्षित

* सिद्ध बाबा कॉलोनी
टीकमगढ़ 472001
मो. 9981411097

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