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Friday, October 16, 2026
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सुखनवर

badrinaath
फोटो साभार अरूण कुमार तिवारी

-प्रकाश केवडे-

prakash kevde
प्रकाश केवडे

वो जाते जाते
अपनी अधूरी
दास्तान छोड गये
अपने पीछे किस्से
कहानियों की
दुकान छोड गये।

मेहनत मशक्कत
से पाई पाई जोड़ी थी
वो सारा खजाना और
खाली मकान छोड़ गए।

खूब सजती महफ़िलें
शमा मुस्कुराती शबे रोज
दाद,वाह वाही का
गरजता दालान छोड गये।

नहीं था सुखनवर
उनसा कोई भी
गमगीन शायरों का वो
एक जहान छोड़ गए।

प्रकाश केवडे

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