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Thursday, October 15, 2026
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नशा, स्पीड और सेल्फी संस्कृति

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-मनु वाशिष्ठ-

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मनु वशिष्ठ

पिछले कुछ समय से कुछ पर्यटन स्थलों पर नहीं पूरे देश में ही पिकनिक, घूमने फिरने, पर्यटन की संस्कृति बढ़ रही है, सभी पर्यटन स्थलों पर केवल छुट्टियों में ही नहीं, सभी मौसम में भारी भीड़ दिखाई देती है। लेकिन इस संस्कृति के साथ ही कुछ (जिन्हें युवा एडवेंचर मानते हैं) आदतें नशा, सेल्फी, स्टंट, गाड़ियों को अंधाधुंध तूफानी स्पीड से चलाने की मानसिकता भी पनप रही है। उनमें पर्यटन स्थल के इतिहास की जानकारी में कोई खास रुचि नजर नहीं आती। उन्हें मतलब होता है सिर्फ अपने फेसबुक पेज पर पर पोस्ट करने के लिए कुछ नई फोटोज। इसे जानलेवा संस्कृति कहें या #विकृति, खासतौर से युवाओं में पनप रही ये आदतें, जिस वजह से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। कितना नुकसान दायक है यह लत। युवा ही नहीं, बुजुर्ग भी सेल्फी के रोग से पीड़ित दिखाई देते हैं, स्टंट करना खतरनाक जगह पर जाकर उन दृश्यों को, यादों को, समय को, अपने कैमरे में समेटने का शौक, कई बार जानलेवा भी सिद्ध हो रहा है। नशा, सेल्फी, स्टंट आदि युवाओं का शगल बनता जा रहा है। अति उत्साह, ओवर कॉन्फिडेंस एवं स्टंटबाजी के जोश में हादसे होना आम बात हो गई है। जोकि समय और स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक है। #लत तो कोई भी सही नहीं है। समय रहते अपने बच्चों पर थोड़ा ध्यान रखें, इन आदतों की वजह से, पता नहीं फोटो पर कब माला पहना दी जाए या जीवन भर का दर्द दे जाए। और उस वक़्त सिवाय पछतावे के कुछ हासिल नहीं होगा।
__ मनु वाशिष्ठ कोटा जंक्शन राजस्थान

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