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Friday, October 16, 2026
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खेल है हमारे जीवन की आवश्यकता

राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त 2022 पर विशेष: मनुष्य जीवन शैली को स्वस्थ्य और शारीरिक तंदुरुस्ती बनाए रखने में खेलों का महत्वपूर्ण योगदान

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-एडवोकेट किशन भावनानी-
वैश्विक स्तरपर खेलों का ट्रेंड बहुत तेजी के साथ बढ़ रहा है, यह न केवल किसी देश की प्रतिष्ठा का सवाल है बल्कि मनुष्य जीवन के स्वास्थ्य और शरीर को भी फिट बनाए रखता है, तथा इनसे मनुष्य का चारित्रिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है। खेल से पुष्ट और स्फूर्तिमय शरीर ही मन को स्वस्थ बनाता है। खेलों से नियम पालन के स्वभाव का विकास होता है और मन एकाग्र होता है।जिसको रेखांकित किया जाना आवश्यक है। प्राचीन काल से आधुनिक काल तक विभिन्न अवस्थाओं से गुजरे खेलों का हमारे दैनिक जीवन को स्वस्थ्य रखने में अमूल्य योगदान को नकारा नहीं जा सकता। चूंकि 29 अगस्त 2022 को राष्ट्रीय खेल दिवस है इसलिए आज हम खेलों और उसमें मानुषी जीवों के स्वास्थ्य, देश की प्रतिष्ठा पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव पर चर्चा करेंगे।

किशन सनमुखदास भावनानी

राष्ट्रीय खेल दिवस मेजर ध्यानचंद की विरासत का सम्मान करने और हमारे जीवन में खेल के महत्व को स्वीकार करने, हमारे जीवन में शारीरिक गतिविधियों और खेलों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम, कार्यशालाएं, राष्ट्रीय सेमिनार आदि सरकार द्वारा विकसित किए जाते हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस के दिन, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, ध्यानचंद पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे कई पुरस्कार खेल में खेल नायकों के योगदान का सम्मान करने के लिए प्रदान किए जाते हैं। खेल प्राचीन काल से आधुनिक काल तक परिवर्तन की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरे हैं। कबड्डी, शतरंज, खो-खो, कुश्ती, गिल्ली-डंडा, तीरंदाजी, गदा आदि परंपरागत खेलों के अलावा भारत विभिन्न देशों के संपर्क में आने से क्रिकेट, जूडो, टेनिस, बैडमिंटन आदि खेलों का भी खूब प्रचलन हुआ है।
खेल के क्षेत्र में अपनी जिंदगी और जी जान लगा देने वाले खिलाड़ियों को ध्यान चंद अवार्ड दिया जाता है। मेजर ध्यान चंद जब हॉकी खेलते थे तो दूसरी टीम का खिलाड़ी गेंद को छीन ही नहीं पाता था। ऐसा लगता था मानो उनकी हॉकी में कोई जादू है। एक बार खेल के दौरान उनकी हॉकी को तोड़ कर चैक किया गया कि कहीं उसमें चुंबक तो नहीं है।
मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था और वह अपने समय के महान हॉकी खिलाड़ी थे। उन्हें हॉकी खिलाड़ी के स्टार या हॉकी का जादूगर के रूप में जाना जाता था, क्योंकि उनकी अवधि के दौरान, उनकी टीम ने वर्ष 1928, 1932 और 1936 के दौरान ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल किए थे। उन्होंने 1926 से 1949 तक 23 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तरपर हॉकी खेली। उन्होंने अपने करियर में कुल 185 मैच खेले और 570 गोल किए। वह हॉकी के बारे में इतना समर्पित थे कि वह चांदनी रात में खेल के लिए अभ्यास किया करते थे, जिससे उसका नाम ध्यानचंद पड़ गया। 1956 में, ध्यानचंद को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया, वह यह सम्मान पाने वाले तीसरे नागरिक थे।
ध्यानचंद, जो पूरी तरह से अपने खेल के लिए समर्पित थे, अपने हॉकी करियर की शुरुआत ब्रिटिश भारतीय सेना की रेजिमेंटल टीम से की थी। ओलंपिक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह दिन में अपने रेजिमेंटल कर्तव्यों को पूरा करने के बाद, रात को चांद की रोशनी में हॉकी का अभ्यास करते थे। प्राचीन काल से आधुनिक काल तक विभिन्न अवस्थाओं से गुजरे खेलों का आज भी हमारे जीवन में महत्व है। मनुष्य जीवन शैली को स्वस्थ्य और शारीरिक तंदुरुस्ती बनाए रखने में खेलों का महत्वपूर्ण योगदान है।

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