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Thursday, October 15, 2026
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सत्यनारायण व्रत आज

-राजेन्द्र गुप्ता-
राजेन्द्र गुप्ता
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सत्यनारायण व्रत करने से और कथा सुनने से पुण्य फल प्राप्त होती है। श्री सत्यनारायण पूजा भगवान नारायण का आशीर्वाद लेने के लिए की जाती है जो भगवान विष्णु के रूपों में से एक हैं। इस रूप में भगवान को सत्य का अवतार माना जाता है। हालांकि सत्यनारायण पूजा करने के लिए कोई निश्चित दिन नहीं है, लेकिन पूर्णिमा या पूर्णिमा के दौरान इसे करना बेहद शुभ माना जाता है।
सत्यनारायण पूजा और व्रत की पौराणिक कथा
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पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से कहा कि हे भगवान, पृथ्वी पर सभी लोग बहुत दुखी नजर आ रहे हैं, इसका कोई उपाय नहीं है। इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि सत्यनारायण का व्रत करने से सबके कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी सत्य को ईश्वर समझकर उसकी पूजा करेगा, उसके सारे पाप कट जाएंगे और उसे शुभ फल की प्राप्ति होगी।
सत्यनारायण व्रत की तिथि 
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5 अप्रैल 2023, बुधवार, चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारंभ – 09:19 पूर्वाह्न, अप्रैल 05
समाप्त – 10:04 पूर्वाह्न, 06 अप्रैल
सत्यनारायण पूजा और व्रत का महत्व
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वैदिक ज्योतिष के अनुसार सत्यनारायण व्रत रखने से भगवान विष्णु को स्वास्थ्य, समृद्धि, धन और वैभव की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि इस दिन व्रत करने और पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सत्यनारायण कथा का पाठ करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं।
सत्यनारायण व्रत की पूजा विधि
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शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है ऐसा माना जाता है। पूजा सुबह के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है और शाम को सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
❀ इस दिन सुबह जल्दी उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
❀ इसके बाद सत्यनारायण की मूर्ति को स्थापित करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांध दें।
❀ पंचामृतम (दूध, शहद, घी/मक्खन, दही और चीनी का मिश्रण) का उपयोग देवता को साफ करने के लिए किया जाता है, आमतौर पर शालिग्राम, जो महा विष्णु का दिव्य पत्थर है।
❀ चौकी पर जल से भरा कलश रखें और देसी घी का दीपक जलाएं।
❀ अब सत्यनारायण की पूजा और कथा करें।
❀ भुने हुए आटे में शक्कर मिलाकर भगवान को अर्पित करें।
❀ प्रसाद में तुलसी जरूर डालें।
❀ पूजा के बाद प्रसाद बांटें।
पूजा एक आरती के साथ समाप्त होती है, जिसमें भगवान की छवि या देवता के चारों ओर कपूर से जलाई गई एक छोटी सी आग की परिक्रमा होती है। आरती के बाद व्रतियों को पंचामृत और प्रसाद ग्रहण करना होता है। व्रती पंचामृत से व्रत तोड़ने के बाद प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076
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