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Thursday, October 15, 2026
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चाय एक आरामगाह है

dr vivek kumar mishra
डॉ. विवेक कुमार मिश्र

– विवेक कुमार मिश्र-

चाय की मांग रह रह कर उठती रहती है
जब आप बहुत थके हों
कुछ भी करने का मन न हो तो
एक चाय ही है जो तसल्ली देती है
और आदमी सोचता है कि चाय पी जाएं
इस तरह एक बात साफ है कि
चाय पीना अपने आप को उब थकान एकरसता से
बाहर निकालने का कदम है
चाय तब भी होती जब मन नहीं लगता
इस तरह थके परेशान हैरान होने पर
चाय एक आरामगाह हो जाती है
इस चाय के साथ
आदमी अपनी दुनिया से निकलकर
एक काल्पनिक दुनिया में चला जाता है
और फिर वहां से निकाल लाता
जीने का फलसफा आनंदित होने का सूत्र
इस तरह चाय एक सामाजिक दुनिया को जीने का
स्वस्थ्य पेय पदार्थ हो जाती
जिसके रास्ते हम सब संसार को जीते हैं ।

– विवेक कुमार मिश्र
सह आचार्य हिंदी
राजकीय कला महाविद्यालय कोटा
एफ -9 समृद्धि नगर स्पेशल बारां रोड कोटा -324002

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