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Thursday, October 15, 2026
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जरूरत के समय आदमी के साथ खड़े रहो

vivek mishra
डाॅ विवेक कुमार मिश्र

– विवेक कुमार मिश्र

एक समय के बाद जो कुछ होता उसका मतलब नहीं रह जाता
जो समय रहते जरूरत पर होता
वही साथ चलता वही काम आता
कई बार समय पर और जरूरत के समय जब आप नहीं होते
और फिर बाद में पूछते हैं कि क्या हाल है तो हाल रहे तब न बताये
ऐसे में हाल हाल की तरह बस पड़ा रहता
हाल पूछने का कोई मतलब नहीं रह जाता
पर सांसारिकता में लोग बाग
अक्सर हाल के लिए हाल पूछते हैं
कर्तव्य की तरह हाल का हाल
बनाते हुए चलते हैं
और हाल है कि फट पड़ता
इसीलिए बराबर यह कहा जाता है कि
जरूरत के समय आदमी के साथ खड़े रहो
उसके साथ कदम दो कदम चलो या न चलो
पर जरूरत हो तो जरूर चलो
पर यह सब कहने सुनने का विषय नहीं है
यह सब जन्मजात ही होता
जिसे चुपचाप निकल जाना नहीं आता नहीं आता।
वह यही पड़ा रहेगा शोर करते।

– विवेक कुमार मिश्र
सह आचार्य हिंदी, राजकीय कला महाविद्यालय कोटा
एफ -9 समृद्धि नगर स्पेशल बारां रोड कोटा -324002

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