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Thursday, October 15, 2026
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ताजमहलों से रखी दूर मुहब्बत हमने। दिल में ऐसा कोई अरमान बनाया ही नहीं।।

shakoor anwar 129
शकूर अनवर

ग़ज़ल
शकूर अनवर
ज़िंदगी को कभी आसान बनाया ही नहीं।
इसकी ख़ातिर कोई सामान बनाया ही नहीं।।
*
ताजमहलों से रखी दूर मुहब्बत हमने।
दिल में ऐसा कोई अरमान बनाया ही नहीं।।
*
लेके बैठे ही रहे फ़हमो फ़िरासत अपनी।
हमने दिल को दिले नादान बनाया ही नहीं।।
”
दिल में जो मौज उठी अम्न* की वो बैठ गई।
हमने इस मौज को तूफ़ान बनाया ही नहीं।।
*
इन दिनों हम भी तो हैवान* बने हैं कितने।
इन दिनों उसने भी इंसान बनाया ही नहीं।।
*
क्या समझता वो सराबों* की हक़ीक़त “अनवर”।
जिसने दिल को कभी वीरान बनाया ही नहीं।।
*
शकूर अनवर
फ़हमो फ़िरासत*अक्लमंदी समझदारी
अम्न*शांति
हैवान* जानवर
सराबो”मरीचिका

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