29.7 C
Kota
Thursday, October 15, 2026
Home Literature तेरी दोस्ती. से ख़फ़ा है ज़माना। मिली है ये कैसी सज़ा दोस्ती...

तेरी दोस्ती. से ख़फ़ा है ज़माना। मिली है ये कैसी सज़ा दोस्ती की।।

shakoor anwar
शकूर अनवर

ग़ज़ल

शकूर अनवर

उठी आसमाॅं पर घटा दोस्ती की।
चली तो सही कुछ हवा दोस्ती की।।
*
मुझे भा गई ये अदा दोस्ती की।
अभी मुझसे वो कल मिला दोस्ती की।।
*
तेरी दोस्ती. से ख़फ़ा है ज़माना।
मिली है ये कैसी सज़ा दोस्ती की।।
*
चमेली को साॅंपों से ख़तरा नहीं है।
मिसाल* ऐसी कोई बता दोस्ती की।।
*
जहाँ नफ़रतों की हैं अंधी सुरंगें।
वहीं अपनी शम्मऐं जला दोस्ती की।।
*
क़सम कोई झूठी न खा दोस्ती में।
तुझे है क़सम बे वफ़ा दोस्ती की।।
*
कोई गीत गा प्रेम के राग में।
ग़ज़ल कोई “अनवर” सुना दोस्ती की।।
*
मिसाल* उदाहरण

Advertisement