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Friday, October 16, 2026
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फिर भी ये कभी कोई सवाल नहीं उठातीं

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symbolic photo courtesy pixabay.com

अपना आसमान

-माला सिन्हा-

pratibha naithani
माला सिन्हा

ये कमउम्र बेटियां
सर पर उठाए अथाह खतरों की गठरी
निकल पड़ती हैं
अपने माता पिता की
झुग्गी झोपड़ियों से बाहर
सुदूर इलाकों की ओर
गांव की किसी बुआ, चाची,
या मौसी का हाथ पकड़
विश्वास की पुख्ता ज़मीन पर पांव रखतीं,

बिना यह जाने कि
कहाँ ले जाएगी इन्हें
इनकी भाग्य रेखा
इनका भविष्य इनके समक्ष
मुहं बाए खड़ा होता सदा
फिर भी
ये कभी कोई सवाल नहीं उठातीं
इन्हें यह भी नहीं मालूम होता
नियति क्या रंग दिखाएगी इन्हें
या गलत हाथों में पड़ कर
क्या होगा इनका हश्र

इनकी मंज़िल होती
कोई अंजाना सा घर
किसी पराए घर की ड्योढी पर
थाम लेतीं अपने कदम!
साध लेतीं अपना वज़ूद
रात दिन की नई दिनचर्या में
बांध लेतीं अस्तित्व अपना
घर की चहारदिवारी से!
किस्मत ने साथ दिया तो अपना ली जातीं
घर के अपनों की तरह!

इनकी कमनीय देह
अपने नाज़ुक कंधो पर उठा लेती
अपने जन्मदाताओं की
जर्जर गृहस्थी का बोझ
दुधारी तलवार पर चलता
इनका निरीह जीवन यूं ही
कैद हो कर सिमट जाता
अपने चंद नामालूम से
सपनों की परिधि में,
जहां होती उनकी अपनी ज़मीन
अपना आसमान !

 

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