26.9 C
Kota
Saturday, October 17, 2026
Home Literature यह संसार तो ऐसे ही चलता चला जायेगा

यह संसार तो ऐसे ही चलता चला जायेगा

poem

-डॉ विवेक कुमार मिश्र-

vivek mishra 162x300
डॉ. विवेक कुमार मिश्र

श्वेत-श्याम के भीतर
कितना कुछ रंग खींच जाता
जीवन का यह
एक दूसरे के साथ एक स्थान से
बनती बिगड़ती रेखाएं तय करती है
यह कोई नहीं जानता कि
इस क्रम में कौन सी रेखा
किस कोण पर कितना मुड़ जायेगी
यह संसार तो ऐसे ही
चलता चला जायेगा
एक बनती रेखा दूसरी बिगड़ती रेखा
से कुछ इसी तरह के सवाल करते
आगे बढ़ जाती है।

(सह आचार्य हिंदी राजकीय कला महाविद्यालय कोटा)

Advertisement