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Saturday, October 17, 2026
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राधा के पायल की रुनझुन कान्हा की मुस्कान है हिंदी

शुभकामनाएं हिंदी दिवस की

-डॉ.रामावतार सागर-

ramavatar
डॉ.रामावतार मेघवाल “सागर”

(1)
कितनी प्यारी प्यारी हिंदी
महके क्यारी क्यारी हिंदी
रोजी रोटी अपनी है ये
हमने रोज सँवारी हिंदी
बाहर तो है फैली पसरी
अपने घर में हारी हिंदी
हर घड़कन में बसती है जो
साँस साँस ने पुकारी हिंदी
इसकी बोली अमृत जैसी
माँ के जैसी प्यारी हिंदी
दुष्यंत के शे’रों ने देखो
कितनी खूब सँवारी हिंदी
कलमकार सब इसके बेटे
हम सबकी महतारी हिंदी
भारतेंदु ने इसको पूजा
सबने खूब दुलारी हिंदी
आजादी की भाषा है ये
लगती बहुत कटारी हिंदी
रंग बिरंगे फूल है सागर
महकी सी फुलवारी हिंदी
(2)
कृषक खेत खलिहान है हिंदी
इस दिल का अरमान है हिंदी
सरसों की भीनी खुश्बू है
लहराता सा धान है हिंदी
सूर कबीरा मीरा तुलसी
मीठा सा रसखान है हिंदी
राधा के पायल की रुनझुन
कान्हा की मुस्कान है हिंदी
हम दोनों का मेल कराती
अपनी तो पहचान है हिंदी
इसकी धड़कन से जिंदा हूँ
सच में मेरी जान है हिंदी
अभिव्यक्ति की भाषा मेरी
भावों का उफान है हिंदी
प्रेमचंद प्रसाद सरीखे
इन रत्नों की खान है हिंदी
कितनी नदियां इसमें मिलती
सागर मेहरबान है हिंदी
डॉ.रामावतार सागर
कोटा,राजस्थान

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