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Friday, October 16, 2026
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जल, जंगल और पहाड़ संरक्षण में हैं देव स्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका

धर्म में ही पर्यावरण का संदेश स्पष्ट है। शेर-बाघ हाथी, मगरमच्छ, सर्प ,गाय, भैंसा ,नंदी, श्वान, मोर, हंस सभी का देवी देवताओं से संबंध दर्शाया गया है

chamunda mata mandie
चामुंडा माता मंदिर

-बृजेश विजयवर्गीय-

बृजेश विजयवर्गीय

रामगढ़ विषधारी बाघ संरक्षित वन से जुड़ा चामुंडा माता जी का मंदिर बूंदी तारागढ़ दुर्ग के पास स्थित है। यहां कभी घना जंगल होता था। इसके पास में ही दोबड़ा महादेव जी का प्रसिद्ध मंदिर भी है। मैं बचपन से माता जी के दर्शन कर रहा हूं, रास्ते का रोमांच अब भी कायम है। लेकिन मेरे देखते-देखते मानवीय दखल ने इस पहाड़ को नंगा कर दिया।
धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व अपने स्थान पर है लेकिन जंगल, पहाड़ों को बचाने में इन देव स्थानों का बड़ा महत्व है। इतनी नैतिकता वनवासी समाज और वनों को नुक़सान पहुंचाने वाले लोग रखते हैं, धार्मिक डर के कारण वन किसी तरह बचे हुए हैं।

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मंदिर में विराजमान चामुंडा माता

वैसे भी हमारे सभी देवी-देवता प्रकृति के संरक्षण और पोषण का संदेश ही देते हैं। नवरात्रि पर्व देवी आराधना का पर्व है। देवी के सभी रुप सिंह वाहिनी, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, मां कात्यानी, काल रात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री सभी की सवारी वन्यजीव, पशु -पक्षी हैं। यही दृश्य देवताओं का भी है। यानी धर्म में ही पर्यावरण का संदेश स्पष्ट है। शेर-बाघ हाथी, मगरमच्छ, सर्प ,गाय, भैंसा ,नंदी, श्वान, मोर, हंस सभी का देवी देवताओं से संबंध दर्शाया गया है। संयोग से वन्यजीव संरक्षण सप्ताह भी इन्हीं दिनों आता है 1 से8 अक्टूबर तक।
कोटा समेत हाड़ौती में इंद्रगढ, रामगढ़ विषधारी बूंदी, रामगढ़ बारां ,नाहरसिगी, डाढदेवी, कुन्हाड़ी, नीली माता जी आदि प्रसिद्ध मंदिर अधिकांश जंगलों व पहाड़ों पर मिलते हैं।

chamunda devi mandir me singh
मंदिर में चामुंडा माता की सवारी सिंह

वन,जल प्रबंधन का आध्यात्मिक ज्ञान स्वार्थवश सिर्फ अंध आस्था तक सिमट गया लगता है। संभवतः इसीलिए कथित लोकतांत्रिक सत्ता और समाज प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर संवेदनहीन बने हुए हैं। देश में कहीं अरावली बचाओ का आंदोलन चल रहा तो कहीं नदियां बचाओ, जल जंगल और गोडावण बचाओ की आवाजें गूंज रही है। वन और वन्य जीव लोक तंत्र में वोटिंग अधिकार नहीं रखते। शायद इसीलिए इस प्रकार की आवाज को अनसुना किया जाता है।
(चम्बल संसद के समन्वयक और पर्यावरण कार्यकर्ता)

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