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Thursday, October 15, 2026
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अशोक गहलोत की बढ़ती सक्रियता: कांग्रेस के लिए संजीवनी या नई बेचैनी?

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photo courtesy social media
अशोक गहलोत की सक्रियता नई नहीं है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उनका राजनीतिक अभियान तेज होना उनकी शैली का हिस्सा रहा है। इसी सक्रियता के दम पर वे तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2028 का राजनीतिक परिदृश्य 2018 जैसा नहीं है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी माहौल नहीं, बल्कि नेतृत्व को लेकर संतुलन बनाए रखना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि गहलोत की सक्रियता कांग्रेस को नई ऊर्जा देती है या फिर नेतृत्व की नई बहस छेड़कर पार्टी के भीतर असहजता बढ़ाती है।

क्या चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं गहलोत?

-देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर रही है या फिर उनके भीतर नई बेचैनी पैदा कर रही है? आज के इस ब्लॉग में इसी सवाल पर चर्चा।

राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत एक बार फिर राज्य की राजनीति में बेहद सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या वह 2028 के विधानसभा चुनाव के बाद चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं? यदि कांग्रेस सत्ता में लौटती है, तो क्या मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार फिर अशोक गहलोत ही होंगे? इन सवालों के जवाब उनकी लगातार बढ़ती सक्रियता में तलाशे जा रहे हैं।

2018 का फैसला और उसके राजनीतिक परिणाम

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद यह व्यापक धारणा थी कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने अशोक गहलोत पर भरोसा जताया और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।

इस निर्णय के राजनीतिक परिणाम भी सामने आए। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राजस्थान की सभी 25 सीटें हार गई। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में भी, अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस अपनी सरकार बचाने में सफल नहीं हो सकी।

इसके विपरीत, 2024 के लोकसभा चुनाव में जब गहलोत मुख्यमंत्री नहीं थे, तब कांग्रेस ने आठ लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की। इस सफलता का श्रेय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, वरिष्ठ नेता सचिन पायलट और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की सक्रिय भूमिका को भी दिया गया।

क्या 2028 में दोहराई जाएगी 2023 की कहानी?

अशोक गहलोत का सक्रिय होना कांग्रेस के लिए निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। लेकिन यदि उनकी सक्रियता का उद्देश्य चौथी बार मुख्यमंत्री बनना है, तो यह कांग्रेस के लिए चुनौती भी बन सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि यदि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले गहलोत मुख्यमंत्री पद सचिन पायलट या किसी अन्य नेता को सौंप देते, अथवा पायलट को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया जाता, तो कांग्रेस शायद सत्ता नहीं गंवाती।

अब सवाल यह है कि क्या 2028 के चुनाव से पहले भी वैसी ही परिस्थितियां बन रही हैं? यदि नेतृत्व परिवर्तन की मांग को नजरअंदाज किया गया और मुख्यमंत्री पद को लेकर फिर वही खींचतान हुई, तो कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी की राह कठिन हो सकती है।

राहुल गांधी के दौरे की चर्चा कम, गहलोत की सक्रियता ज्यादा

जून महीने में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी दो बार राजस्थान आए। एक बार कोटा में छात्रों से संवाद करने और दूसरी बार पुष्कर में जिला कांग्रेस अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए।

पुष्कर में जिला अध्यक्षों को दस दिन का प्रशिक्षण दिया गया। उम्मीद थी कि प्रशिक्षण के बाद वे अपने-अपने जिलों में संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय होंगे। वहीं, कोटा में छात्रों के साथ राहुल गांधी के संवाद को भी कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम बताया।

लेकिन इन दोनों दौरों के बाद राजनीतिक गलियारों, मीडिया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सबसे अधिक चर्चा यदि किसी विषय की हो रही है, तो वह अशोक गहलोत की बढ़ती सक्रियता है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या राहुल गांधी के संगठनात्मक प्रयासों का प्रभाव गहलोत की राजनीतिक सक्रियता के सामने दबता जा रहा है?

कांग्रेस की सफलता का मंत्र क्या है?

राजस्थान में लंबे समय से सत्ता परिवर्तन का राजनीतिक इतिहास रहा है। ऐसे में 2028 में कांग्रेस के सत्ता में लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इसकी सबसे बड़ी शर्त यही होगी कि पार्टी नेतृत्व व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एकजुटता के साथ चुनाव लड़े।

यदि मुख्यमंत्री पद की दौड़ चुनाव से पहले ही चर्चा का केंद्र बन गई, तो इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। संगठन को मजबूत करने, जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने और सामूहिक नेतृत्व की भावना विकसित करने पर ही कांग्रेस की सफलता निर्भर करेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं।)
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