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Thursday, October 15, 2026
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कुदरत का करिश्मा या राजनीतिक संयोग: जयपुर एयरपोर्ट पर सिद्धारमैया-गहलोत मुलाकात के मायने

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photo courtesy social media

जयपुर एयरपोर्ट पर खराब मौसम के कारण कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के विमान की अचानक लैंडिंग और वहां अशोक गहलोत से हुई मुलाकात ने राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। क्या यह महज संयोग था या फिर कांग्रेस नेतृत्व, निष्ठा और पीढ़ी परिवर्तन का राजनीतिक संदेश? यह लेख इसी राजनीतिक विमर्श और उसके संभावित संकेतों का विश्लेषण करता है।

-देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

इसे कुदरत का करिश्मा कहें या राजनीतिक संयोग, गुरुवार 28 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने चार्टर्ड विमान से बेंगलुरु से दिल्ली जा रहे थे। अचानक मौसम खराब होने के कारण उनका विमान कुछ समय के लिए जयपुर एयरपोर्ट पर उतर गया। जयपुर हवाई अड्डे पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सिद्धारमैया का स्वागत कर उनसे मुलाकात की। अब इस मुलाकात को कुदरत का करिश्मा कहें या राजनीतिक संयोग, इस पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कुदरत का करिश्मा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि खराब मौसम के चलते सिद्धारमैया का विमान जयपुर एयरपोर्ट पर उतारा गया। वहीं, इसे राजनीतिक संयोग इसलिए माना जा रहा है क्योंकि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं जयपुर एयरपोर्ट पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने पहुंचे।

इस राजनीतिक संयोग की चर्चा इसलिए भी जरूरी हो जाती है क्योंकि वर्ष 2022 में राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान ने तत्कालीन राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा था। उस समय राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर कर्नाटक में थे, लेकिन अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। राहुल गांधी राजस्थान की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, ताकि राजस्थान में कांग्रेस सरकार की वापसी हो सके। मगर अशोक गहलोत ने राहुल गांधी और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बात नहीं मानी और मुख्यमंत्री बने रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को राजस्थान की सत्ता गंवानी पड़ी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का विशेष विमान मौसम खराब होने के कारण जयपुर एयरपोर्ट पर उतरा या फिर यह कोई राजनीतिक संदेश था, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ ही घंटों बाद सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना हो गए, लेकिन जाने से पहले वे मानो अशोक गहलोत को पार्टी के प्रति निष्ठा, ईमानदारी और नेतृत्व के प्रति वफादारी का राजनीतिक संदेश देकर गए हों।

क्या सिद्धारमैया ने अशोक गहलोत से मुलाकात कर यह संदेश दिया कि पार्टी और नेतृत्व सर्वोपरि होते हैं? राहुल गांधी के एक निर्देश पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने पार्टी हित में मुख्यमंत्री पद छोड़ने का निर्णय स्वीकार किया। उन्होंने पद से बड़ा पार्टी और नेतृत्व को माना। ऐसा ही अवसर वर्ष 2022 में अशोक गहलोत के सामने भी था, लेकिन उन्होंने पार्टी और नेतृत्व से बड़ा मुख्यमंत्री पद को माना और इस्तीफा नहीं दिया।

कांग्रेस लंबे समय से राजनीतिक रूप से कठिन दौर से गुजर रही है। ऐसे में राहुल गांधी युवाओं को आगे लाकर पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं। इसके लिए वरिष्ठ नेताओं को नए चेहरों के लिए त्याग करना होगा। वर्ष 2022 में अशोक गहलोत ने ऐसा त्याग नहीं किया, लेकिन कर्नाटक में सिद्धारमैया ने पार्टी हित को प्राथमिकता दी। अब माना जा रहा है कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

अब सवाल यह है कि क्या राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सिद्धारमैया से मुलाकात के बाद राजस्थान में ऐसा कोई कदम उठाएंगे? क्या वे सचिन पायलट, टीकाराम जूली या गोविंद सिंह डोटासरा जैसे नए चेहरों को आगे बढ़ाएंगे? इसका जवाब 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के आसपास ही मिलेगा। हालांकि, चुनाव में अभी समय है, लेकिन अशोक गहलोत की राजनीतिक सक्रियता यह संकेत दे रही है कि वे चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

गुरुवार 28 मई को जयपुर एयरपोर्ट पर सिद्धारमैया और अशोक गहलोत के बीच हुई मुलाकात का राजनीतिक निष्कर्ष क्या निकलेगा, इसका पता आने वाले समय में चलेगा। यह मुलाकात कुदरत का करिश्मा थी या राजनीतिक संयोग, यह भी भविष्य तय करेगा। दिलचस्प बात यह भी रही कि उसी विमान में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी मौजूद थे। वही सुरजेवाला, जिन्हें उस समय राजस्थान में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था, जब अशोक गहलोत की मुख्यमंत्री कुर्सी पर संकट खड़ा हो गया था।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

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