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Friday, October 16, 2026
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ग़म के साए हैं लंबे बहुत। हर ख़ुशी मुख़्त़सर फिर वही।।

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गजल।

शकूर अनवर

शकूर अनवर
दर्द की रह गुज़र फिर वही।
ज़िंदगी का सफ़र फिर वही।।
*
फिर वही गर्दिशे आसमाॅं।
अपने शामो सहर फिर वही।।
*
खेत खलियान सहमे हुए।
बिजलियों का है डर फिर वही।।
*
हम सलीबों पे लटके हुए।
ज़िंदगी दार पर फिर वही।।
*
ज़लज़ला ज़लज़ला हर तरफ़।
सब इधर सब उभर फिर वही।।
*
ग़म के साए हैं लंबे बहुत।
हर ख़ुशी मुख़्त़सर फिर वही।।

फिर वही “अनवर” ए मुब्तला।
हो गई ऑंख तर फिर वही।।
*
शकूर अनवर

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