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Wednesday, October 28, 2026
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पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए फिर उठी आवाज, अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई की मांग

-आईएफडब्ल्यूजे के 76वें स्थापना दिवस पर जयपुर के शहीद स्मारक पर जुटे पत्रकार

राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपते हुए आईएफडब्ल्यूजे राजस्थान के पदाधिकारी।

-राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को सौंपा ज्ञापन
-19 दिन के धरने के बाद भी लंबित हैं मांगें, संगठन ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी

जयपुर। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्यूजे) के 76वें स्थापना दिवस पर बुधवार को प्रदेशभर के पत्रकार जयपुर के शहीद स्मारक पर एकत्र हुए। पत्रकारों ने राजस्थान में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने, आजीविका की सुरक्षा और लंबित मांगों के समाधान की आवाज उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकार वर्षों से अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत पत्रकारों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। संगठन के प्रदेश सचिव एवं बाड़मेर के वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बोथरा के 25 अक्टूबर को हुए आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने पत्रकारों के हितों के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया।

अरुण चतुर्वेदी को सौंपा ज्ञापन
कार्यक्रम के बाद प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी से मुलाकात की। उन्हें पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने और लंबित मांगों के समाधान के लिए ज्ञापन सौंपा।
चतुर्वेदी ने पत्रकारों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू है, वहां के कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने संगठन से संबंधित राज्यों के कानूनों के मसौदे उपलब्ध कराने को कहा, ताकि राजस्थान में भी इस दिशा में पहल की जा सके। संगठन ने अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर विस्तृत दस्तावेज उपलब्ध कराने पर सहमति जताई।
प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनवीर सिंह चुंडावत, प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष भट्टाचार्य, संरक्षक विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश सचिव शालिनी श्रीवास्तव, पाली जिलाध्यक्ष अरुण जोशी, सवाई माधोपुर जिलाध्यक्ष राजेश शर्मा और कुलदीप गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।

19 दिन धरना दिया, फिर भी नहीं हुआ समाधान
प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि पत्रकार दूसरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, लेकिन उन्हें स्वयं अपनी सुरक्षा, सम्मान और आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। संगठन ने पहले भी शहीद स्मारक पर लगातार 19 दिन धरना दिया था। इसके बावजूद प्रमुख मांगें लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकार सरकार से टकराव नहीं चाहते। उनकी मांग केवल सुरक्षित वातावरण में काम करने और सम्मानजनक आजीविका की है। सरकार को अब आश्वासनों से आगे बढ़कर निर्णय लेने चाहिए।
जरूरत पड़ी तो लंबा संघर्ष करेंगे
वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनवीर सिंह चुंडावत ने कहा कि पत्रकारों का काम आंदोलन करना नहीं, बल्कि समाज और सरकार के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है। लेकिन जब उनकी सुरक्षा और आजीविका पर संकट आएगा, तो उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए 19 दिन के बजाय 19 वर्ष भी संघर्ष करना पड़ा तो संगठन पीछे नहीं हटेगा।
पत्रकार की परिभाषा में उलझा सुरक्षा कानून
प्रदेश सचिव शालिनी श्रीवास्तव ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने में हो रही देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार की परिभाषा तय करने के नाम पर वर्षों से इस मुद्दे को उलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के बीच रहकर जनहित के मुद्दे उठाने और शासन-प्रशासन से सवाल करने वाले पत्रकारों को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। छोटे और मझोले समाचार पत्रों, डिजिटल माध्यमों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए भी प्रभावी प्रावधान जरूरी हैं।
धमकियों और झूठे मुकदमों पर जताई चिंता
कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए पत्रकारों ने काम के दौरान मिलने वाली धमकियों, कथित प्रशासनिक दबाव, झूठे मुकदमों और आजीविका प्रभावित करने वाली कार्रवाइयों पर चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारों के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से होने वाली कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता को कमजोर करती है। संगठन ने ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा तेज
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होने तक संघर्ष जारी रहेगा। सरकार को अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर राजस्थान में भी इसकी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों की लगातार अनदेखी हुई तो आंदोलन को व्यापक बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। स्थापना दिवस पर पत्रकारों ने एकजुट होकर संदेश दिया कि सवाल पूछना पत्रकारों का काम है। इसे प्रतिशोध का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण में स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।

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