29.7 C
Kota
Thursday, October 15, 2026
Home Literature हमें भी प्यास की शिद्दत से कर गया बे हाल। हमारे सर...

हमें भी प्यास की शिद्दत से कर गया बे हाल। हमारे सर पे भी होकर गुज़र गया सूरज।।

shakoor anwar 129
शकूर अनवर

ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

हुई सहर तो फ़लक से उतर गया सूरज।
हवेलियों की छतों पर बिखर गया सूरज।।
*
हमें भी प्यास की शिद्दत से कर गया बे हाल।
हमारे सर पे भी होकर गुज़र गया सूरज।।
*
ये कैसी ओट लगी अब्र* की चढ़े दिन में।
कहाॅं गया वो उजाला किधर गया सूरज।।
*
है अब तो धूप दरख़्तों की ऊॅंची शाखों पर।
हमारे घर से तो कब का गुज़र गया सूरज।।
*
ग़ुरूब* होना था हमको नई सहर के लिए।
उसी के साथ चले हम जिधर गया सूरज।।
*
ये क्या कमाल है “अनवर” कि शाम होने पर।
हर एक शय* को ॲंधेरों से भर गया सूरज।।
*

अब्र* बादल ग़ुरुब*यानी अस्त होना
नई सहर* नई सुबह
शय” वस्तु

शकूर अनवर

Advertisement