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Saturday, October 17, 2026
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जल, जंगल, जमीन के लिए वनस्पति को लुप्त होने से बचाना होगा

-ए एच जैदी-

ए एच जैदी

(नेचर एवं टूरिज्म प्रमोटर)

हम मुकुंदरा में बाघ और चीते तो बसाने की बात करते हैं लेकिन जल, जंगल और जमीन को बचाने के प्रयास नहीं करते। जबकि यह तीनों चीजें हमारे पर्यावरण और जंगलों के विकास से जुडी हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। टाइगर और चीते बाहर से लाने की बात की जाती है। जबकि इनके लिए हमारे यहां पर्याप्त संख्या में प्रे बेस भी नहीं है। यहां तक कि इनके लिए प्रेबेस भी बाहर से ही लाते हैं। वास्तविकता यह है कि जब हम प्रे बेस को ही विकसित नहीं कर सकते तो टाइगर और चीते को कैसे बसा सकेंगे। हाल ही में मुकुंदरा में एक और टाइगर ने बीमारी की वजह से दम तोड दिया। इसको लेकर हायतोबा मची है। यह बहुत दुखद घटना है और इसका मुकुंदरा में टाइगर बसाने के प्रयासों को गहरा झटका लगा है। लेकिन मुकुंदरा से सैकडों वनस्पति धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। जबकि इन वनस्पतियों से ही जंगल और इसके जीव पनपते हैं। इनमें प्रे बेस के काम आने वाले हिरण, चीतल इत्यादी शामिल हैं। बायलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने 2010 में मुकुंदरा का दौरा किया था तब पूर्व के मुकाबले वनस्पति की सौ से अधिक जातियां कम पाई थीं। यह गहन चिंता का विषय है लेकिन वनस्पतियों की रक्षा और उन्हें विकसित करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

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जोधपुर में बायलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डिप्टी डायरेक्टर ने अपनी टीम के साथ मुकुंदरा में 15 दिन तक वि​िभन्न प्रजातियों की स्थिति के बारे में अध्ययन कर रिपोर्ट वन्य जीव विभाग कोटा को पेश की थी।
जंगल से औषधीय पौधे लगातार घट रहे है। ऐसा ही महुआ भी है जिससे लोग शराब भी बनाते हैं। जबकि इसका फल स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। कहा जाता है कि आदिवासी लोग इसको खाने में भी उपयोग करते थे जिससे उनको पर्याप्त पोषण मिल जाता था। बारां जिले में महुआ अधिक होता है। इसके फूल और फल जंगल में शाकाहारी वन्यजीव भी खाते हैं और सालभर का पोषण प्राप्त करते हैं।
जंगल मे अक्सर कई बार भूख लगने या वैसे ही माहौल के हिसाब से खाने पीने का मन करता है तब यही वनस्पतियां मनुष्य के भी काम आती हैं। लेकिन इसके लिए ध्यान रखना पड़ता है कि कौन सी वनस्पति या फल मनुष्य के खाने के योग्य हैं। क्योंकि जहरीले फल खाने से जान भी जा सकती है। इसके लिए वैज्ञानिकों का सीधा मंत्र है कि जो फल बन्दर खा रहे हों आप वही फल खाएं। क्योकि बन्दर जहरीली चीज़ नही खाते। तेंदू, बीलपत्र, लिसोड़े, गूलर आदि ऐसे फल हैं जो मनुष्य के लिए भी न केवल भोजन योग्य हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं। इनमें कुछ तो औषधीय पौधे हैं। इसी तरह जंगल में आम, जामुन, खिरणी, खजूर, झाडी के बेर मिल जाते हैं।

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में 1996 में तीन दिन लक्ष्मीपुरा में तथा तीन दिन दामोदर पूरा में रहा हूं इस दौरान रात में पैंथर को जाते हुए देखा । और दिन में जंगल मे रहने वाले लगभग सभी जानवरो व पक्षियो को देखा । पक्षियो में पेरेडाइज़ फ्लाई केचर,गोल्डन ओरियल, नाइट जार, सेंड ग्रॉस, ट्री पाई और पिकॉक , कोयल, इंडियन पिटटा, बटेर ,पाईड कुक्कू, हमिंग बर्ड आदि देखे थे।

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