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Monday, October 26, 2026
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गहलोत-पायलट की मुस्कुराहट पर टिकी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उम्मीदें

2028 तक हाथ थामे रहे दोनों नेता, तभी राजस्थान में सत्ता वापसी की राह होगी आसान

photo courtesy social media

-देवेंद्र यादव-

devendra yadav
देवेन्द्र यादव

25 अक्टूबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली की तैयारियों के सिलसिले में जयपुर पहुंचे थे। केसी वेणुगोपाल की अगवानी कर रहे राजस्थान कांग्रेस के नेताओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसे देखकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठा कि काश! दोनों नेता 2028 के विधानसभा चुनाव तक इसी तरह हाथ पकड़कर मुस्कुराते रहें। दोनों नेता तब तक अपने हाथ न छोड़ें, जब तक कांग्रेस 2028 में राजस्थान की सत्ता में वापसी न कर ले। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत पर दोनों नेता इसी तरह मुस्कुराएं और पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को भी मुस्कुराने का अवसर दें।

मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और गुटबाजी की चुनौती

गहलोत और पायलट, दोनों कांग्रेस के बड़े नेता हैं और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जाते हैं। 2028 में यदि कांग्रेस राजस्थान की सत्ता में वापस आती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के समर्थक नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक तकरार बनी हुई है। इस तकरार के कारण राजस्थान में कांग्रेस कमजोर दिखाई देती है।

इसका नजारा हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में देखने को मिला। चुनावों की घोषणा से पहले लग रहा था कि कांग्रेस सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को बुरी तरह शिकस्त देगी, लेकिन परिणाम आए तो कांग्रेस को भाजपा के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। इसकी बड़ी वजह नेताओं की गुटबाजी और प्रत्याशियों के चयन में उनकी मनमानी नजर आई।

कमोबेश ऐसा ही नजारा निकाय चुनावों के बाद पंचायत राज चुनावों में भी देखने को मिला। प्रत्याशियों के चयन में लंबे समय से कुंडली मारकर बैठे नेताओं की मनमानी सामने आई। पंचायत राज चुनावों के परिणाम अभी नहीं आए हैं। परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि नेताओं के चेहरों पर दिखाई देने वाली मुस्कुराहट 2028 के विधानसभा चुनाव तक बरकरार रहती है या नहीं।

मुख्यमंत्री की कुर्सी से जुड़ा है दोनों नेताओं का गम

अशोक गहलोत और सचिन पायलट की मुस्कुराहट को देखकर यह सवाल भी उठता है कि कहीं इसके पीछे कोई गम तो नहीं छिपा है? ऐसे में गीत की ये पंक्तियां याद आती हैं— तुम इतना क्यों मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो।

दोनों नेताओं का गम मुख्यमंत्री की कुर्सी से जुड़ा है। वर्ष 2018 में कांग्रेस ने राजस्थान की सत्ता में वापसी की थी। उस समय सचिन पायलट राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे और माना जा रहा था कि पार्टी हाईकमान उन्हें मुख्यमंत्री बनाएगा, लेकिन अशोक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री नहीं बन पाने का गम सचिन पायलट और उनके समर्थकों के मन में आज भी बरकरार है।

वहीं, वर्ष 2023 में कांग्रेस लगातार दूसरी बार अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार नहीं बना पाई। इसका गम अशोक गहलोत और उनके समर्थकों में भी अब तक बना हुआ है। कांग्रेस के सत्ता में नहीं लौट पाने के पीछे पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद भी अहम मुद्दे रहे। पायलट समर्थक नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के कारण कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।

टिकटों की बंदरबांट से आम कार्यकर्ताओं में नाराजगी

गहलोत और पायलट की मुस्कुराहट पर कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं की नजर इसलिए भी है, क्योंकि लंबे समय से कुंडली मारकर बैठे नेताओं ने स्थानीय निकाय और पंचायत राज चुनावों में जिस तरह टिकटों की बंदरबांट की, उससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि कांग्रेस के स्वयंभू नेता 2028 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान ऐसी मनमानी नहीं करेंगे।

यदि निकाय और पंचायत राज चुनावों की तरह विधानसभा चुनाव में भी टिकटों के बंटवारे में मनमानी और गुटबाजी हावी रही, तो निकाय चुनावों जैसे परिणाम 2028 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी की राह आसान नहीं होगी।

रैली में भीड़ जुटाना आसान, एकजुटता बनाए रखना चुनौती

केसी वेणुगोपाल 1 नवंबर की रैली को सफल बनाने के लिए राजस्थान के नेताओं से बातचीत करने जयपुर पहुंचे थे। राजस्थान के नेता रैली को सफल बनाने के लिए दिल्ली में कार्यकर्ताओं की भीड़ तो जुटा देंगे, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये नेता एकजुट होकर 2028 तक साथ चलेंगे? क्या वे आपसी मतभेद भुलाकर कांग्रेस की झोली में राजस्थान की सत्ता डाल पाएंगे और पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को भी मुस्कुराने का मौका देंगे?

इस सवाल का जवाब पाने के लिए अभी 2028 तक इंतजार करना होगा। फिलहाल, गहलोत और पायलट की मुस्कुराती तस्वीर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में उम्मीद जरूर जगाई है। अब देखना यह है कि यह मुस्कुराहट राजनीतिक एकजुटता में बदलती है या महज एक तस्वीर बनकर रह जाती है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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