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Saturday, October 24, 2026
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पंजाब में 2027 की सत्ता की लड़ाई: कांग्रेस की वापसी या भाजपा का नया दांव!

photo courtesy social media

-अमित शाह और चरणजीत सिंह चन्नी के बयानों से गरमाई सियासत

-देवेंद्र यादव-

devendra yadav
देवेन्द्र यादव

2027 में पंजाब में किस दल की सरकार बनेगी, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक बार फिर कहा कि कांग्रेस अगले 30 वर्षों तक देश की सत्ता में नहीं आएगी। वहीं, अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि भाजपा अपने 15 वर्षों के शासन के बाद अगले 70 वर्षों तक सत्ता में नहीं आएगी। दोनों नेताओं के बयान पंजाब की धरती से आए हैं। अमित शाह का कहना है कि केंद्र में अगले 30 वर्षों तक कांग्रेस की सरकार नहीं बनेगी, जबकि चन्नी का दावा है कि भाजपा 15 वर्षों के शासन के बाद अगले 70 वर्षों तक केंद्र की सत्ता में नहीं आएगी।

पंजाब में कांग्रेस की वापसी या भाजपा की पहली सरकार?

महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल चुनाव पंजाब में होने हैं, जहां न तो भाजपा और न ही कांग्रेस की सरकार है। राज्य में आम आदमी पार्टी सत्ता में है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2027 में कांग्रेस पंजाब की सत्ता में वापसी करेगी? क्या भारतीय जनता पार्टी पंजाब में भी पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा की तरह अपनी सरकार बनाने में सफल होगी? इन सवालों के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं।

क्षेत्रीय दलों के कमजोर होने के बाद भाजपा ने बनाई सरकार

देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा के सरकार बनाने के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो कई राज्यों में पहले क्षेत्रीय दलों के उभार के कारण कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। इसके बाद कांग्रेस कमजोर होती गई और भाजपा ने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर सरकार बनाई। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया। अपने 15 वर्षों के शासन के दौरान आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को दिल्ली में दोबारा मजबूत होने का मौका नहीं दिया। हालांकि, 15 साल बाद आम आदमी पार्टी भी दिल्ली की सत्ता से बाहर हो गई और भाजपा ने अपनी सरकार बना ली। ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक समीकरणों के बीच भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत की और सरकार बनाने में सफलता हासिल की।

क्या पंजाब में भी दिल्ली जैसी रणनीति अपनाएगी भाजपा?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को हराकर सत्ता हासिल की थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा दिल्ली की तरह पंजाब में भी अपनी सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है? क्या केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने बयान से इसकी राजनीतिक शुरुआत कर दी है?

पंजाब में भाजपा पहले अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ती रही है। ऐसे में यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल एक बार फिर गठबंधन करेंगे। क्या बिहार की तर्ज पर पंजाब में भी भाजपा और अकाली दल मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करेंगे? इन सवालों के जवाब चुनावी समीकरणों के साथ स्पष्ट होंगे।

पंजाब कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती: नेताओं की महत्वाकांक्षा

हालांकि, पंजाब की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस को लेकर है। पंजाब में कांग्रेस न तो कमजोर है और न ही पहले कमजोर रही है। लेकिन पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी यह दिखाई देती है कि उसके पास नेताओं की संख्या अधिक है, जबकि कार्यकर्ताओं की भूमिका अपेक्षाकृत कमजोर नजर आती है। पार्टी में कई नेता ऐसे हैं, जो विधायक और मंत्री पद से आगे सीधे मुख्यमंत्री पद की दावेदारी करते हैं। मुख्यमंत्री पद को लेकर पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच बनी महत्वाकांक्षाओं और आपसी खींचतान के कारण ही पार्टी ने 2022 में सत्ता गंवाई थी।

अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर पंजाब में 2022 का इतिहास दोहराएगी? मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ी है। ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेताओं को एकजुट रखने और चुनाव में सामूहिक नेतृत्व के साथ उतरने की होगी।

सचिन पायलट के सामने कांग्रेस को सत्ता में लौटाने की चुनौती

कांग्रेस ने राजस्थान के प्रमुख नेता सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया है। सचिन पायलट को एक मजबूत चुनावी रणनीतिकार माना जाता है। वर्ष 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद पार्टी में उनकी भूमिका और राजनीतिक रणनीति की चर्चा व्यापक रूप से हुई थी।

अब देखना होगा कि क्या सचिन पायलट 2027 के विधानसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराने में सफल हो पाएंगे। उनके सामने पार्टी के नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने, संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी।

क्या चरणजीत सिंह चन्नी पर फिर भरोसा जताएगा कांग्रेस हाईकमान?

पंजाब में दलित नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अब भी लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस हाईकमान उन पर एक बार फिर पूरा भरोसा जताएगा? राहुल गांधी ने जिस तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था, क्या वैसा ही भरोसा 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उन पर किया जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

चन्नी पंजाब में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। लेकिन उनकी सक्रियता कांग्रेस को सत्ता में वापसी करा पाएगी या नहीं, इसका जवाब पार्टी के नेताओं की एकजुटता में छिपा है। यदि पंजाब कांग्रेस के नेता आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर चुनाव लड़ते हैं, तो पार्टी के लिए सत्ता में वापसी की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

 

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