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Thursday, October 15, 2026
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बंगाल में सियासी गतिविधियों ने बढ़ाए सवाल

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photo courtesy social media
पश्चिम बंगाल की सियासत में बढ़ती हलचल और नेताओं की बदलती सक्रियता यह संकेत दे रही है कि भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति अभी से तैयार कर रही है। तीसरे मोर्चे की संभावनाओं और कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता के बीच, बंगाल एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बनता नजर आ रहा है।

– देवेंद्र यादव-

devendra yadav
देवेन्द्र यादव

क्या भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार 2029 के लोकसभा चुनाव में कामयाबी पाने के लिए जीत की स्क्रिप्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लिख रहे हैं? पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और उसकी नेता ममता बनर्जी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लगातार राजनीतिक हमले किए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का भाजपा में विलय होने के बाद, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का अचानक पश्चिम बंगाल जाना और वहां तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार करना कई सवाल खड़े करता है। राजनीतिक दृष्टि से विश्लेषण करें तो यह भी सवाल उठता है कि पहले चरण के मतदान से पहले अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव प्रचार में क्यों नहीं पहुंचे, जबकि दूसरे चरण से ठीक पहले केजरीवाल ममता बनर्जी के समर्थन में सक्रिय क्यों हो गए?


 तीसरे मोर्चे की संभावनाओं पर चर्चा
क्या 2029 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में देश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के खिलाफ तीसरा मोर्चा बन सकता है? यदि गैर-कांग्रेस तीसरा मोर्चा बनता है, तो क्या इसका राजनीतिक लाभ 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिल सकता है?


 2024 के चुनाव का अनुभव अभी भी प्रभावी
भारतीय जनता पार्टी शायद 2024 के लोकसभा चुनाव को नहीं भूली है। कांग्रेस के नेतृत्व में बने इंडिया गठबंधन के कारण भाजपा बहुमत से दूर रह गई थी। जबकि भाजपा ने “अबकी बार 400 पार” का नारा दिया था, लेकिन वह 240 सीटों पर ही सिमट गई। वहीं, कांग्रेस को एक दशक बाद 99 सीटें जीतने का मौका मिला और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी हासिल हुआ।


 बंगाल में कांग्रेस की सक्रियता और बदली रणनीति
यदि पश्चिम बंगाल की बात करें तो कांग्रेस ने लंबे समय बाद सभी विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे अपनी टीम के साथ सक्रिय नजर आ रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों पर बराबर हमले कर रहे हैं। भाजपा भी शायद यह समझ चुकी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सभी सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ सकती है।


 तीसरा मोर्चा—कांग्रेस को रोकने की रणनीति?
यदि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है और तीसरा मोर्चा नहीं बनता, तो इससे कांग्रेस को नुकसान नहीं बल्कि फायदा हो सकता है। शायद इसी कारण पश्चिम बंगाल में 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर तीसरे मोर्चे की आहट सुनाई देने लगी है। यदि देश में तीसरा मोर्चा बनता है, तो उसका उद्देश्य भाजपा को सत्ता से हटाना नहीं, बल्कि कांग्रेस को सत्ता में आने से रोकना भी हो सकता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)


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