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Thursday, October 15, 2026
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राजस्थान की राजनीति में बयानबाज़ी के बहाने फिर उभरी अंदरूनी खींचतान

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photo courtesy social media
राधा मोहन अग्रवाल के बयान ने राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही संभावित खींचतान और सचिन पायलट की भूमिका पर उठते सवालों को भी उजागर करता है।

-देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

सवाल यह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान के राष्ट्रीय प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री सचिन पायलट के बारे में, उनके विधानसभा क्षेत्र टोंक में क्या बयान दिया। महत्वपूर्ण यह भी है कि क्या कांग्रेस के भीतर अभी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच बड़ा तकरार है। भाजपा के राष्ट्रीय नेता राधा मोहन अग्रवाल के बयान की इस रूप में भी समीक्षा की जा सकती है कि उन्होंने टोंक से विधायक कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सचिन पायलट पर टोंक में जाकर खिलाफ बयान क्यों दिया। क्या इसकी जरूरत भाजपा को थी, जबकि अभी राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने में लंबा समय बाकी है, और सचिन पायलट को कांग्रेस हाईकमान ने कांग्रेस का राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दे रखी है! सवाल यह भी है कि राधा मोहन अग्रवाल का यह बयान किस नेता को फायदा पहुंचाएगा। स्वाभाविक है कि यह उसी को फायदा पहुंचाएगा, जो कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए प्रबल दावेदार होगा। क्योंकि राधा मोहन अग्रवाल के बयान के बाद सचिन पायलट का मानेसर प्रकरण भी याद दिलाया गया। मतलब क्या राधा मोहन अग्रवाल ने जो कहा, वह सही है? यदि सचिन पायलट के संदर्भ में राधा मोहन अग्रवाल के द्वारा दिया गया बयान गलत है, तो फिर सचिन पायलट के मानेसर प्रकरण की याद दिलाना कहां तक उचित है? इसीलिए कहा जा रहा है कि क्या राजस्थान कांग्रेस के भीतर अभी भी सब कुछ ठीक नहीं है, बल्कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, वैसे-वैसे नेताओं के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर रेस तेज होती जाएगी!

क्या कांग्रेस के भीतर पायलट की भूमिका को लेकर संशय कायम है?

बात भाजपा के राष्ट्रीय नेता राधा मोहन अग्रवाल द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सचिन पायलट पर दिए गए बयान की हो रही है। सचिन पायलट कुछ समय से हाईकमान और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। राहुल गांधी ने सचिन पायलट को केरल जैसे महत्वपूर्ण राज्य के विधानसभा चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी भी दी थी और इस वक्त वे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बाद प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के भीतर ही कुछ नेता सचिन पायलट के पर कतरने की तैयारी में तो नहीं जुटे हैं? इसका जवाब तो स्वयं राहुल गांधी को ही तलाशना होगा, क्योंकि वे 2018 से लगातार प्रयास कर रहे हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने और सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनें। 2018 में अवसर भी आया था, लेकिन सचिन पायलट की जगह अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2023 में कांग्रेस लगातार सत्ता में वापसी की ओर बढ़ती दिख रही थी, लेकिन सचिन पायलट को चेहरा नहीं बनाया गया और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस हाईकमान और राहुल गांधी 2028 में सत्ता में वापसी के लिए 2018 की तरह सचिन पायलट को जिम्मेदारी सौंपने जा रहे हैं? और क्या राधा मोहन अग्रवाल का बयान, सचिन पायलट के पर कतरने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है?

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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