
-देवेंद्र यादव-

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 25 अक्टूबर को बिहार के पटना में एक सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की। इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में प्रदर्शन किया। खड़गे के बयान का बचाव करने के लिए महाराष्ट्र में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष सड़क पर आंदोलन करता है, तो उसे सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि सत्ता पक्ष प्रदर्शन करता है, तो उसे अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। संजय राउत ने इस दोहरे मापदंड पर सवाल उठाते हुए सत्ता पक्ष के भाजपा नेताओं के पुराने बयानों की याद दिलाई और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जोरदार बचाव किया।
खड़गे के बयान के बाद इंडिया गठबंधन एकजुट नजर आया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक जाल में फंसते जा रहे हैं? पिछले दो-तीन दिनों में इसके दो उदाहरण सामने आए हैं।
पहला मामला: राहुल गांधी की रैली और व्यापारियों की चिंता
राहुल गांधी ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की घोषणा की। इस पर भाजपा नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दीपावली के समय रैली आयोजित करने से व्यापारियों को नुकसान होगा। दिल्ली के व्यापारियों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली दीपावली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया था।
व्यापारियों के इस अनुरोध पर राहुल गांधी ने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे दें, तो रैली 30 सेकंड में समाप्त हो जाएगी। इस बयान के जरिए राहुल गांधी ने गेंद सत्तारूढ़ भाजपा के पाले में डाल दी।
अब सवाल यह है कि क्या दिल्ली का व्यापार मंडल राहुल गांधी को पत्र लिखने के बाद इसी तरह का पत्र भाजपा सरकार को भी भेजेगा? यह देखने वाली बात होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राहुल गांधी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वोट चोरी के खिलाफ इंडिया गठबंधन की रैली हर हाल में एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होगी।
दूसरा मामला: खड़गे के बयान पर भाजपा का देशव्यापी प्रदर्शन
दूसरा मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी से जुड़ा है। इस मामले में भी भाजपा के नेता घिरते नजर आए, क्योंकि कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों को सामने लाने लगे। खड़गे के बयान के बाद भाजपा ने देशव्यापी प्रदर्शन किया। इसके बाद इंडिया गठबंधन के संजय राउत जैसे नेताओं ने प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब विपक्ष प्रदर्शन करता है, तो उसे अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन सत्ता पक्ष के नेताओं को प्रदर्शन के लिए अनुमति लेने की जरूरत क्यों नहीं होती? उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताया। शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की घोषणा की है और यह रैली होगी।
रैली को सफल बनाने में जुटे कांग्रेस नेता
एक नवंबर को होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस के नेता विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहे हैं। इसके लिए पार्टी ने अपनी टीम भी गठित की है। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल राजस्थान और पंजाब के दौरे पर थे। यहां उन्होंने रैली को सफल बनाने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ चर्चा की। सचिन पायलट और केसी वेणुगोपाल भी रैली की तैयारियों के सिलसिले में राजस्थान और पंजाब का दौरा कर रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में दलित नेता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी रैली को सफल बनाने के लिए राज्य का दौरा कर रहे हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये लेखक के निजी विचार हैं।)


















