
-नशा मुक्ति के वादे पर भाजपा और आम आदमी पार्टी को घेरा, नेताओं की एकजुटता पर भी नजर
-दलित मतदाताओं को साधने की रणनीति के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे राहुल
-देवेन्द्र यादव-

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार, 4 नवंबर को नशा मुक्ति के वादे को लेकर पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक काउंटर अटैक किया। उन्होंने दोनों दलों के वादों की हकीकत से पंजाब की जनता को रूबरू कराया। राहुल गांधी के इस राजनीतिक हमले के बाद केंद्र की सत्ता में बैठे भाजपा नेताओं के मन में भी शायद यह सवाल उठा होगा कि ‘आप तो ऐसे न थे!’ क्योंकि कभी राहुल गांधी को पप्पू कहा गया, कभी आलू से सोना बनाने वाला नेता बताया गया और न जाने कितने तरह के राजनीतिक आरोप उन पर लगाए गए। लेकिन अचानक इतना राजनीतिक ज्ञान कहां से आ गया? शायद यही सोचकर केंद्र और पंजाब की सत्ता में बैठे नेता राहुल गांधी के राजनीतिक बदलाव पर विचार करने को मजबूर हुए होंगे।
राहुल-खड़गे ने किया चुनावी शंखनाद
4 नवंबर, बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पंजाब में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इसी के साथ उन्होंने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के चुनावी अभियान का आगाज कर दिया।
दिल्ली की रैली के बाद पंजाब पर फोकस
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई ऐतिहासिक और विशाल रैली के तुरंत बाद राहुल गांधी की पंजाब में जनसभा कई राजनीतिक संकेत दे रही है। यह साफ बता रही है कि राहुल गांधी पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर कितने गंभीर हैं। वह पंजाब में कांग्रेस की वापसी और पार्टी की सरकार बनते हुए देखना चाहते हैं। इसके लिए उनकी कोशिश है कि पंजाब कांग्रेस के सभी नेता आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरें।
यही वजह है कि राहुल गांधी 4 नवंबर को पंजाब पहुंचे। वहां उन्होंने मंच पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं को एक साथ देखा। यह भी संदेश देने की कोशिश की कि पंजाब कांग्रेस के नेता भी राज्य में पार्टी की सत्ता में वापसी चाहते हैं। इसीलिए सभी नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ने की तैयारी करते हुए नजर आ रहे हैं।
सचिन पायलट और प्रगट सिंह पर भरोसा
पिछले दिनों राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी अपने भरोसेमंद नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को सौंपी। वहीं, पंजाब कांग्रेस कमेटी का प्रदेश अध्यक्ष हॉकी के महान खिलाड़ी और विधायक प्रगट सिंह को बनाया गया। सचिन पायलट बेहतर चुनावी रणनीतिकार माने जाते हैं, जबकि प्रगट सिंह पंजाब के लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं। लेकिन पंजाब की चुनावी राजनीति में तीसरा महत्वपूर्ण नाम पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का है।
दलित मतदाताओं पर कांग्रेस की नजर
चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के लोकप्रिय दलित नेता हैं। पंजाब में करीब 40 प्रतिशत मतदाता दलित वर्ग से आते हैं। वहीं, राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 34 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। यही वजह है कि पंजाब विधानसभा चुनाव दलित मतदाताओं के नजरिए से सभी राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। दलित मतदाताओं का समर्थन हासिल करना किसी भी पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा।
राजेंद्र पाल गौतम की मौजूदगी के राजनीतिक मायने
दलित मतदाताओं को साधने की कांग्रेस की रणनीति का संकेत 4 नवंबर को राहुल गांधी की पंजाब जनसभा में भी दिखाई दिया। इस सभा में कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद रहे। राजेंद्र पाल गौतम राजनीतिक सोशल इंजीनियरिंग के माहिर नेता माने जाते हैं। राहुल गांधी ने उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रभारी भी बना रखा है। उत्तर प्रदेश में भी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम का पंजाब में राहुल गांधी के साथ मंच पर नजर आना बताता है कि कांग्रेस नेतृत्व पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर कितनी गंभीरता से तैयारी कर रहा है। इसकी एक बड़ी वजह पंजाब में दलित मतदाताओं की निर्णायक भूमिका भी है। कांग्रेस के पास राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के रूप में एक बड़ा दलित चेहरा मौजूद है, जो लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं।
एकजुटता ही तय करेगी कांग्रेस की वापसी का रास्ता
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पंजाब में कांग्रेस सत्ता में वापसी कर पाएगी? इसका जवाब काफी हद तक पंजाब कांग्रेस के नेताओं की एकजुटता पर निर्भर करेगा। 4 नवंबर को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस के सभी बड़े नेता एक मंच पर एकजुट दिखाई दिए। लेकिन सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी के बिना भी ये नेता इसी तरह एकजुट नजर आएंगे? क्या चुनाव के दौरान भी इनकी एकजुटता कायम रह पाएगी?
टिकट बंटवारे के बाद होगी असली परीक्षा
इसका पता पंजाब विधानसभा चुनाव की घोषणा और उसके बाद कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी होने पर चलेगा। क्योंकि चुनाव से पहले मंच पर दिखाई देने वाली एकजुटता की असली परीक्षा टिकट वितरण के समय होती है। तब तक हमें इंतजार करना होगा कि पंजाब कांग्रेस के नेता अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर पार्टी की सत्ता में वापसी के लिए कितनी मजबूती से एक साथ खड़े रहते हैं।
नशा मुक्ति के वादे पर राहुल का काउंटर अटैक
फिलहाल सवाल यह भी है कि क्या पंजाब विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राहुल गांधी ने भाजपा और आम आदमी पार्टी के नशा मुक्ति के वादे की हवा निकाल दी है? क्या राहुल गांधी पंजाब की जनता को यह समझाने में सफल हो रहे हैं कि नशे की समस्या पर राजनीतिक वादे करने और उसे वास्तव में खत्म करने के प्रयासों में कितना अंतर है? राहुल गांधी का पंजाब दौरा और उनकी जनसभा के राजनीतिक संदेश आने वाले विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)


















